Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Ibadat

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22 -Aug-2014 Surbhi Pankaj Family Poems 0 Comments  1,320 Views
Ibadat

Tanha rah gye jindgi ke mele m,
sb chod gye hmko yu hi akele m.
Khali kamare ki chahardeewari hm par hasti h,
qki hme lga apno ki keemat hi to sabse sasti h.
Hiteshi pehchanane m hm chooke h,
tbhi to is tanhai ke andhere m hm doobe h.
Andhere m to kambkhat parchayi bhi sath chod deti h,
mushkil m sari duniya muh mod leti h.
Soone pal is tarah se khaye jate h,
ki ek tukda bhi purani yaado k sath chodna na chahate h.
Apni bebasi apne aap pr rulati h,
aaj phir se aapki bhut yad ati h.
Tasveero m band chehre ykayak puchne lgte h,
qa ab hm vapas aa sakte h.
Qa toot chuka h tumhara ye gurur,
apna smjho to batana jrur.
Baahain felaye taktaki lgaye hm teyar khade h,
ki fisal kr aaj smbhal se gye h.
Keemat qa h apno ki andaja aaj lg chuka h,
tbhi to aaj y sar unki ibadat m jhuka h.

Ibadat


इबादत

तनहा रह गए जिंदगी के मेले में ,
सब छोड़ गए हमको यूँ ही अकेले में .
खाली कमरे की चारदीवारी हम पर हँसती है,
क्योंकि हमें लगा अपनों की कीमत ही तो सबसे सस्ती है .
हितैषी पहचानने में हम चूके हैं,
तभी तो इस तन्हाई के अँधेरे में हम डूबे हैं.
अँधेरे में तो कमबख्त परछाई भी साथ छोड़ देती है,
मुश्किल में सारी दुनिया मुँह मोड़ लेती है .
सूने पल इस तरह से खाये जाते हैं ,
कि एक टुकड़ा भी पुरानी यादों के साथ छोड़ना न चाहते हैं .
अपनी बेबसी अपने आप पर रुलाती है ,
आज फिर से आपकी बहुत याद आती है .
तस्वीरो में बंद चेहरे यकायक पूछने लगते है ,
क्या अब हम वापस आ सकते हैं .
क्या टूट चूका है तुम्हारा ये गुरुर ,
अपना समझो तो बताना जरूर .
बाहें फैलाये टकटकी लगाये हम तैयार खड़े हैं,
की फिसल कर आज संभल से गए है .
कीमत क्या है अपनों की अंदाजा आज लग चुका है ,
तभी तो आज ये सिर उनकी इबादत में झुका है .


Dedicated to
My family

Dedication Summary
bcoz i don't want to loose them.

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