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Ye Kaisa Parivar

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23 -Sep-2013 Madan Saxena Family Poems 2 Comments  2,618 Views
Madan Saxena

मेरे जिस टुकड़े को दो पल की दूरी बहुत सताती थी
जीवन के चौथेपन में अब ,बह सात समन्दर पार हुआ

रिश्तें नातें -प्यार की बातें , इनकी परबाह कौन करें
सब कुछ पैसा ले डूबा ,अब जाने क्या व्यवहार हुआ

दिल में दर्द नहीं उठता है भूख गरीबी की बातों से
धर्म देखिये कर्म देखिये सब कुछ तो ब्यापार हुआ

मेरे प्यारे गुलशन को न जानें किसकी नजर लगी है
युवा को अब काम नहीं है बचपन अब बीमार हुआ

जाने कैसे ट्रेन्ड हो गए मम्मी पापा फ्रेंड हो गए
शर्म हया और लाज ना जानें आज कहाँ दो चार हुआ

ताई ताऊ , दादा दादी ,मौसा मौसी दूर हुएँ अब
हम दो और हमारे दो का ये कैसा परिवार हुआ

ग़ज़ल प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना



Dedicated to
Lonly Parents

Dedication Summary
Because sons & Daughters should Understand Their parents Difficulties at old age.

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2 More responses

  • shraddha the poetess
    Shraddha the poetess (Registered Member)
    Commented on 26-September-2013

    bahot pyari poem......mata pita bachchon k liye aaj bhi vrdaan hain bs jinke paas hain un me s kuchh ko unki kadrr nahi hai pr aasha hai jld hi wo smjh jayein k mata pita s badkr koi nahi hai ......

  • Harjeet Nishad
    Harjeet Nishad (Registered Member)
    Commented on 24-September-2013

    nice....

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