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फरिश्ते भला हम क्यों बने

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06 -Sep-2018 Anand kumar (Manish) Terrorism poems 0 Comments  483 Views
Anand kumar (Manish)

हमारे देश का स्वर्ग
अब स्वर्ग न रहा
देखने में यह नर्क
से बत्तर लग रहा


लगाए जा रहे हैं कहीं
देश विरोधी नारे
हो रही है कहीं
जमकर पत्थरबाजियाॅ


जलाया जा रहा कहीं
हमारा तिरंगा
लहराया जा रहा है कहीं
पाकिस्तानी झंडा


हो रही कहीं
आतंक की खेती
दे रहा है पाकिस्तान
भारत को चुनौती


हुआ है क्या मेरे देश को
नहीं समझ कोई पा रहा
इस भीड़-भाड़ भरी जिंदगी में
कौन समझना चाह रहा


व्यस्त हैं सभी देशवासी
अपने-अपने कामों में
सुनना नहीं चाहता है
कोई इनका दर्द अपने कानों में


इनका दर्द
भला हम क्यों सुने
फरिश्ते इनके लिए
भला हम क्यों बने


बनना चाहिए था जिन्हें
वो तो चैन से सो रहे
समस्या सुनके इनकी
हम क्यों रो रहे


यह सोचके मैं नहीं रोया था कि
कैसे इन्हें बचाऊंगा
देशद्रोही आतंकवादियों को
देश से कैसे भगाऊंगा


यह सोचके मैं रोया था कि
इनको कैसे समझाऊंगा
नर्क बनते इस कश्मीर को
मैं फिर से स्वर्ग कैसे बनाऊंगा


©️ आनंद कुमार (मनीष)
Post No-04
Poem written date-30/08/18
पता -दुधानी दुमका
झारखंड (814101)
Ph no-8877003131
ईमेल सं- anandkumar814151@gmail.com

फरिश्ते भला हम क्यों बने


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