Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

फर्क

0
29 -Feb-2020 Kavya Shekhr Integration Poems 0 Comments  394 Views
Kavya Shekhr

ये जाती पाती के फेर में तू क्यों बंदे पड़ता है,
उसने ही (ख़ुदा) जब फर्क किया ना तू क्यों पगले करता है ।
खोल समझ के पर्दे अपने देख चालें कोई चलता है ।
हमको लड़वाता आपस मे, अपना उल्लू सीधा करता है ।
आओ मिल कर खाए कसम ,ना जलने देंगे अपना वतन,
हम है भारत जो हर मंदिर ,हर मस्ज़िद में बसता है, जो हर दिल मे रहता है ,
ना है हिन्दू ना मुसलमान हम, हम है बस हिन्दुस्तानी जो अपने वतन पे मरता है ।


©️ काव्या शेखर



Dedicated to
हिन्दुस्तान

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017