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फिर पुनर्जन्म..........१

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24 -Sep-2017 Aman Memories Poems 0 Comments  762 Views
Aman

एक दिन शायद मैं चला जाऊ ....
.....
दूर कही दूर अनन्ता की ओर
इस ज़मी से दूर तेरे आसमा से दूर
इस शाहिल से दूर तेरे निशा से दूर
पर न मेरे खातिर तू अश्क बहाना
मैं लौट आऊगा ,आज नहीं तो कल
कल नहीं तो कल शायद कल
पर शायद न मेरी ये शक्ल हो
शायद न तेरा ये ज़िस्म
पर मैं आऊगा ज़रूर
मैं हवा सा बन जाऊगा ,
या रेत सा उड जाऊगा
पर मैं आऊगा ...........
.........
आशा नहीं यकी है तू भूल जाएगी मुझे
पर जब भी मैं मिलू तो ये जाहिर ना करना
वरना बेकार हो जाएगा ,बेबुनियाद हो जाएगा
मेरा पुनर्जन्म .........
तू ही कह देगी गर
मेरी पहचान क्या ..
तेरी झूठ मेरी सच का निशान क्या
तू ही गर लौट जाएगी समंदर में
तो इस तिनके का सहारा क्या ..
मेरे जन्म मृत्यु का किनारा क्या
पर मैं ये बात जानता हु
इसीलिये मैं फिर आऊगा ...
शायद फिर से "पुनर्जन्म "...
..
....... ....#अमृत चन्द्र मिश्रा 'अमन '

फिर पुनर्जन्म..........१


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