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Fir se chali hu

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10 -Jul-2018 deepika manghnani Motivational Poems 1 Comments  233 Views
deepika manghnani

बिखरी यादों को समेटे, टूटे कुछ ख्वाबो को लेके,
फिर से चली हूँ मैं ....कुछ सपनो को संजोने !!
फिर से चली हूँ , ढूंढ़ने कुछ खुशियों के कोने !!!

बहते उन आँसुओ को पोचके, जाती मुस्कान को कुछ लम्हे और रोकके ,
जुकता सर फिर से उठाकर, टूटी-बिखरी हिम्मत को थोड़ा और जुटाकर ,
हां तू है उस काबिल , ये अपने दिल को मनाने ,
चली हूँ फिर से ,, अपने जीवन के लक्ष्य को पाने !!

बिखरे मोती को एक माला मे पिरोकर ,
दिल के कुछ रिश्तो को खोकर,
चल दी हूँ खुद से नया रिश्ता बनाने ,
चल दी हूँ फिर से खोये रस्ते पाने !!

जल जाए जिससे हर कोई ,
उस दूप की आदी हूँ अब ,
जो सुन भी ना सके कोई ,
उन लफ्ज़ो की आदी हूँ अब ,
हार कर अक्सर एक मुकाम पर रुक जाते है जब !!
सिर्फ एक हौसला नया रास्ता दिखता है तब !!

इनही आदतों को हौसला बनाके,
लौटी हूँ हार के रास्ते से , कुछ दूर तक जाके ,
अपमान के इस रेगिस्तान मे , सम्मान का बीज बोन ,
फिर से चली हूँ मैं ....कुछ सपनो को संजोने !!
फिर से चली हूँ , ढूंढ़ने कुछ खुशियों के कोने !!!




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2 More responses

  • deepika manghnani
    Deepika manghnani (Registered Member)
    Commented on 16-July-2018

    @Arvind
    Thanks arvind, yes you can use this poem, its my pleasure. :).

  • poemocean logo
    Arvind (Guest)
    Commented on 16-July-2018

    Beautiful poem. I need this kind of motivational poem for my project. I hope I can use this. Poem all credit will goes to you.

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