Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

महकाएँ परिवेश

0
11 -Apr-2018 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 0 Comments  389 Views
महकाएँ परिवेश

खिले हुए फूलों से करते सभी लोग हैं प्यार, निकट रखा करते सीने के इन्हें बनाकर हार। इनका मोहक रूप जगाता मन में नव उल्लास, और गंध से होता अनुपम सुख का भी आभास। देवों के सिर इन्हें चढ़ा हम जतलाते आभार, छुपा हर्ष मन का बत

फूल और घास

0
02 -Jul-2017 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 0 Comments  893 Views
फूल और घास

फूल और घास ___________________ खिले घास के ऊपर देखो कितने सुन्दर फूल, इन्हें देख लगता जीवन में सब कुछ ही अनुकूल। भूल सभी दुःख जाते हैं हम इन दोनों को देख मिट जाती मस्तक ऊपर से चिन्ताओं की रेख। देख देख कर हरी घास को शीतल होती आँख

कमल

0
12 -Apr-2017 Anju Goyal Flower Poem 0 Comments  2,823 Views
कमल

  कैसे   तनकर  खड़ा  इठलाता   सुंदरता पर  बड़ा  इतराता    पानी के  अंदर  लहराता      राष्ट्र  का  अभिमान  कमल      सबके  मन  को खूब  लुभाता   कीचड़ में भी  अस्तित्व  बनाता   संस्कृति  की पहचान कराता     राष्ट्र का  अभिमान  

Kamal

0
27 -Nov-2016 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 0 Comments  2,085 Views
Kamal

कमल ____________ सुन्दर कोमल पुष्प कमल लगते हैं कितने निर्मल , कीचड़ में भी रहकर ये हँसी बिखेरे दुग्ध धवल। नीचे लहरें हैं चंचल ऊपर ये हैं खडे़ अटल, खुश रहते हैं अपने में नन्हे शिशु जैसे निश्छल। नहीं छोड़ते जल से जड़ सिर ऊँ

Gurhal Ke Phool (Hibiscus Flower)

0
08 -Sep-2016 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 0 Comments  1,781 Views
Gurhal Ke Phool (Hibiscus Flower)

गुड़हल के फूल ___________________ कैसे सुन्दर खिले हुए हैं बीच हरे पत्तों में गुड़हल, जैसे जग को देख रहे हों चंचल बालक सम मचल मचल । केसर के हाथों को फैला चाह रहे झुक छूना धरती, उँगली जैसी लाल पंखुरी प्रातः की लाली को हरती। कण पर

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017