Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

नवोदय मे पढ़ा करते थे (Navodaya Wali Baatein)

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23 -Nov-2020 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  120 Views
नवोदय मे पढ़ा करते थे (Navodaya Wali Baatein)

नवोदय मे पढ़ा करते थे मस्त मगन रहा करते थे। ना धूप की चिंता, ना कपड़ों का डर हम तो मट्टी मे ही खेला करते थे।। एक के पापा सब्जी बेचा करते थे दूसरे के पापा रिक्शा चलाया करते थे। हम ऐसे बच्चे थे जो नवोदय मे पढ़ा करते थे।। ल

मेरे पास होने का देते आभास हैं।

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01 -Aug-2020 Dr. Swati Gupta Friendship Poems 0 Comments  195 Views
मेरे पास होने का देते आभास हैं।

मेरे दोस्त बहुत ही खास हैं, मुझको देते वो एक नई आस हैं। रोज न हो चाहें मुलाकातें उनसे, फिर भी रहते सदा मेरे पास हैं। कनेक्शन जुड़ा दिल का दिल से, दोस्ती में घोले मधुर मिठास हैं। यूँ तो लम्बी लिस्ट नहीं दोस्तों की, नाय

मिठास ढूंढता हूँ

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09 -Jul-2020 Jyoti Ashukrishna Friendship Poems 0 Comments  766 Views
मिठास ढूंढता हूँ

जिंदगी की भागदौड़ से जब थक जाता हूँ आँख मूँद बैठता, फिर वो एहसास ढूंढता हूँ वो मेरे यारों-दोस्तों के संग की मिठास ढूंढता हूँ स्कूल में वो एक चॉकलेट के लिए लड़ना- झगड़ना, रूठना-मनाना छोटी सी बात पर मुँह फुलाना, फिर मि

Ye sirf dost nhi jigri yaar h mere

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05 -May-2020 Ajit Dubey Friendship Poems 0 Comments  292 Views
Ye sirf dost nhi jigri yaar h mere

Ye ladke sirf mere dost nhi meri jaan h Hifazat krna e khuda inki Ye sirf tere bande nhi Ye meri bhi shan h Jb me akela tha tb inka sath tha Jb tuta tha me ik bewafa k hatho Tb inka hi sath tha Jb yaado me gum me rhne laga tha uske Tb sharab pila kr dj pr nachna sikhaya Me tha jis jhute pyar k andhere me Uska asli chahra inhone dikhaya Ha manta hu h to kamine sb ke sb Krte h meri bejjat bohat Pr inke alawa or koi krke to dikhaye Saale mere kahne se phle hi mera har kaam kar jaate h Koi ungli uthaye mujh pr Bina soche lad jate h Kitni tarife gin

नवोदयन हो तुम

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15 -Apr-2020 Friendship Poems 0 Comments  677 Views
नवोदयन हो तुम

खाने की लाइन में खड़े होकर थाली घुमाते हो तो नवोदयन हो तुम, 5 मिनट पहले उठ कर भी असेम्बली में नहाकर पहुँच जाते हो तो नवोदयन हो तुम मेस से रोटी सब्जी अचार मिर्ची चुरा के खाते हो तो नवोदयन हो तुम रात को बाउंडरी वाल फांद

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