Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

हम नवोदय से क्यो निकल गए

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02 -Mar-2020 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  277 Views
हम नवोदय से क्यो निकल गए

खामोशी के पन्नो पर नवोदय की याद लिख दे , इन अनसुनी राहों पर आज कोई फ़रियाद लिख दे . वो कोमल सी निष्पाप हँसी , वो खिलखिलाता सा मन , ना जाने इन यादों में , कैसे खो गए नवोदय के दिन ! पलट कर देख, वही महका समां है , यादों की करवट

आज फिर नवोदय मे जाने को मन करता है by Pankaj Chourey Navodayan!!!

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26 -Feb-2020 देवम सेंगर Friendship Poems 0 Comments  339 Views
आज फिर नवोदय मे जाने को मन करता है by Pankaj Chourey Navodayan!!!

कुछ खुदा से अधूरी फरियादे, कुछ यारो से मिलने के वादे, खो गया है वक़्त मे सबकुछ ना जाने कहाँ, आज खोज लाने को मन करता है, जिंदगी का जो अमिट हिस्सा है, उसी नवोदय मे जाने को मन करता है, कभी सुबह पी.टी.से शुरुआत, कभी हसीं का सम

Main aaj Dosto se mil kr aaya hu

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23 -Jan-2020 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  452 Views
Main aaj Dosto se mil kr aaya hu

मैं आज दोस्तों से मिलकर आया हूं, पोटली थी भरी गिले-शिकवे और गमों से, Zehan की सारी मुश्किलों का हल करके आया हूं, मैं आज दोस्तों से मिलकर आया हूं बहुत बातें की, यादों से रोशन कई रातें की, अकेले में बिताए हर पल और सालों का ह

Yaaro se milne jaayege

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13 -Jan-2020 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  291 Views
Yaaro se milne jaayege

Kae saalo baad yaaro se milne jayege, Kuch unke dilo ki sunege, kuchh apna haal batayege, Kae saalo baad yaaro se milne jayege Kya kya beeta hum pr or kaise beeta dilo pr, Har ek panna dard ka ek doosre ko khol kr deekhayge, Kae saalo baad yaaro se milne jayege Vaise haatho main chhote chhote paimaane bhee honge, Or dil ki gehraiyo main dafn kae dard purane honge, ek k baad ek safha palate jayege, Kae saalo baad yaaro se milne jayege Main tere saath hu bss itna kehna dost ka kaffee hoga, Uske iss andaaz se he, kae zakhm dil k bhar jayege, Kae s

वो नवोदया ही अच्छा था !!!

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29 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  310 Views
वो नवोदया ही अच्छा था !!!

वो नवोदया ही अच्छा था ये जवानी हार गयी नवोदया के दिन ही अच्छे थे ये कॉलेज की पढ़ाई मर गयी वो मोज मस्ती तो नवोदया की थी जहा छटवी से लेकर बरहवी का साथ था वो नवोदया स्कूल नहीं परिवार था जहां सब एक दूसरे के लिए मरते थे बि

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