Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

रहबर दोस्त।

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25 -Jan-2022 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  101 Views
रहबर दोस्त।

मुझे अपने दोस्तों रहबरो पर बड़ा नाज़ है, दू कुछ भी तीखा, कड़वा उनको परोस कर, मगर हर बुर्की के बाद कहते हैं, क्या स्वाद है, मैं सिर्फ मुंह से बातें करता हूं, और वो दिल की भी सुन लेते हैं, लाख छुपाओ दिल के जख्मों को, मगर व

दोस्त का जवाब।

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09 -Dec-2021 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  184 Views
दोस्त का जवाब।

ए दोस्त तेरी हर बात सच्ची है, मैं मानता हूं, क्या खोया और क्या पाया मै ये सब जानता हूं, तू तो अम्बालवी है, अपने जज्बातों को कलम से लिख सकता है, दर्द, प्यार इधर उतना ही है मगर तेरा दोस्त कैसे दिखा सकता है, दूर हूं शहर, दे

मिलने आ जा यार।

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09 -Dec-2021 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  328 Views
मिलने आ जा यार।

अब तो मुझसे मिलने आ जा तू यार, गुज़ारे थे तेरे साथ, जो मस्तियां के पल, निकाले थे तेरे साथ ,कई जवाबों के हल, आज जिंदगी के सूनेपन में कैसे फंस गए है यार, अब तो मुझसे मिलने आ जा तू यार, खाई मिलकर जो रोटी, उस रोटी की भूख लगी ह

मैं तुम्हारा हूं।

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23 -Jul-2021 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  437 Views
मैं तुम्हारा हूं।

मैं मन वचन कर्म से तुम्हारा हूं, मुझे बस थोड़ा आज़ाद रहने दो, मैं कई बेबस दोस्तों का सहारा हूं, पर मैं मन वचन कर्म से तुम्हारा हूं, मैं सारा दिन तुम्हारे बारे में सोचता हूं, हर बार, हर किसी से बस तुम्हारी बाते करता हू

जो बीत गए वो दिन भी अच्छे थे

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21 -Jun-2021 Hanuman Gope Friendship Poems 0 Comments  0 Views
जो बीत गए वो दिन भी अच्छे थे

जो बीत गए वो दिन भी अच्छे थे जो साथ रहे वो दोस्त भी सच्चे थे ! न पैसों का फिक्र, न समय का खयाल था न भविष्य का ज़िक्र, न बातों का मलाल था! जब जैसा होता वैसा कह देते थे मतभेदों को भी हंस कर सह लेते थे ! कभी मज़ाक बन जाते, कभी

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