Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Bin Beej Ka Phal Hai Kela

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25 -Jun-2016 Suresh Chandra Sarwahara Fruit Poems 0 Comments  2,779 Views
Bin Beej Ka Phal Hai Kela

बिना बीज का फल है केला कुछ लम्बा - सा कुछ पतला, कमर झुका कर तनिक बीच में रहा उम्र अपनी बतला । सचमुच बहुत पुराना फल यह रहा नाम इसका कदली, पूजा में भी चढ़ती आई गूदे से यह भरी फली। हरी पौध होती है इसकी केवल एक तने वाली, फूट

Naarangi

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21 -Jun-2016 Suresh Chandra Sarwahara Fruit Poems 0 Comments  1,157 Views
Naarangi

लाल पीत रंगों से रंगी फिर भी कहलाती नारंगी, इसको खाओ तो मन भीतर बजती खुशियों की सारंगी। बाहर का छिलका हटते ही फाॅंकें दिखती घेर घनेरी, जिनकी तह में संरक्षित है रस वाले कोशों की ढेरी। बच्चे बूढे़ रोगी दुर्बल इसके

Jaamun Ka Fal Gunkaari

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16 -Jun-2016 Suresh Chandra Sarwahara Fruit Poems 0 Comments  1,074 Views
Jaamun Ka Fal Gunkaari

वर्षा आई गिरे पेड़ से गदराए काले जामुन, इन चिकने स्वादिष्ट फलों को बीन रहे बच्चे चुन चुन। खाकर गूदा बड़े चाव से थूक रहे बाहर गुठली, खट्टे फल भी इनको लगते मिश्री की ज्यों मधुर डली। कुछ बच्चे तो पुड़िया में रख नमक सा

Lichi Ki Madmast Bahaarein

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16 -Jun-2016 Suresh Chandra Sarwahara Fruit Poems 0 Comments  2,107 Views
Lichi Ki Madmast Bahaarein

तीखी गर्मी के जाते ही वर्षा की जब पड़े फुहारें, तब दिखती है बाजारों में लीची की मदमस्त बहारें। टहनी पत्ते सजे साथ में संग संग चलते ज्यों अपने, पानी से तन शीतल करती जब आतप से लगती तपने। लाल गुलाबी कत्थे जैसा छिलका द

Angur

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16 -Jun-2016 Suresh Chandra Sarwahara Fruit Poems 1 Comments  5,241 Views
Angur

लटक रहे हैं हरे सुनहरे बेलों पर कितने अंगूर, ताक रहे हैं इनके गुच्छे पेड़ों पर बैठे लंगूर। कभी लोमड़ी भी उछली थी हुई भूख से जब मजबूर, ऊॅंचे थे ये पा न सकी तो बोली- खट्टे हैं अंगूर। भरा हुआ है इनके अन्दर मीठा रस कितना

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