Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मौत से मेरी मुलाकात

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26 -Feb-2018 Akshunya Funeral Poems 0 Comments  1,016 Views
मौत से मेरी मुलाकात

आज मेरी मौत से मुलाकात हो गई, जो न सुने कोई वह ऐसी बात हो गई, जब मैंने उसे देखा, मेरी हलक में जुबान हो गई, उसने कहा धीरे से घबराता क्यों है, मैं तेरी थी अनकही कहानी, जो आज सच्चाई हो गई, सब डरते हैं, परिचय से भी मेरे; पर मैं

जो छूट गए

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13 -Aug-2017 Neha Sonali Agrawal Funeral Poems 0 Comments  1,026 Views
जो छूट गए

वो गोद जो, माँ की डांट से बचाए, वो गोद जो, निःस्वार्थ प्यार लुटाये, वो गोद बड़ी ही न्यारी थी, लाड और दुलार से पूरित थी. वो बोल जो, मीठी कहानियां सुनाये, वो बोल जो, आशीष के गीत गायें, वो बोल तो सुंदर मोती थे, स्नेह के धागे म

Mrat Kaaya Ka Rodan (मृत काया का रोदन) POEM NO. 230 (Chandan Rathore)

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19 -Jul-2017 Chandan Rathore Funeral Poems 0 Comments  1,032 Views
Mrat Kaaya Ka Rodan (मृत काया का रोदन) POEM NO. 230 (Chandan Rathore)

POEM NO . 230 ------------ मृत काया का रोदन ------------ मृत काया के लिए हुआ आज फिर करुणा मय रोदन | छोटे छोटे बच्चों की आशाओं का हुआ शोषण || रूठ गए जग छोड़ गए वो, अब कुछ ना रहा कृन्दन | लोग करे समाज करे, बस बेमेल बिन वजह चिंतन || उठा कर काया बच्चों

जनाज़ा-एक उठावा (funeral-an arrival)

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01 -Aug-2016 Dilesh Jain Funeral Poems 0 Comments  1,307 Views
जनाज़ा-एक उठावा (funeral-an arrival)

मैं जब था तो किसी को मेरा एहसास ना था, आज मैं जाने लगा तो सब रोने लगे, पता नहीं सच्चे है या झूठे पर तुम नहीं तुम्हारे आँसु रोने लगे, पूरी ज़िंदगी में चार लोगों का सहारा ना मिला , आज चार लोगों का सहारा भी मिला, मेरे लिए द

सफर (घर से मरघट तक )

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03 -Jun-2016 Madan Saxena Funeral Poems 0 Comments  2,362 Views
सफर (घर से मरघट तक )

आँख से अब नहीं दिख रहा है जहाँ ,आज क्या हो रहा है मेरे संग यहाँ . माँ का रोना नहीं अब मैं सुन पा रहा ,कान मेरे ये दोनों क्यों बहरें हुए. उम्र भर जिसको अपना मैं कहता रहा ,दूर जानो को बह मुझसे बहता रहा. आग होती है क्या आज मा

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