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गांव की परिभाषा!

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21 -Feb-2019 सुमित.शीतल Countryside Poems 0 Comments  1,568 Views
सुमित.शीतल

कविता: गांव की परिभाषा!

पापा जी ये गांव कैसा होता है, बता दो,
बड़ा उत्सुक हूं, हो सके तो जाकर दिखा दो।
सुना है कि किसान वंहा पर फसले है उगाते,
कैसे करते वो खेती, ये काम दिखा दो।
कैसे गेंहू-चावल-गन्ना बोते है,
ये सबकुछ भी जाकर दिखा दो।
बांग-ए-मुर्गा, कुआ, खेत, जमीन कैसे होते है,
ये जानने को हूं बेकरार, अब तो दिखा दो।
मिट्टी वाले कच्चे घर गांव के कैसे होते,
ये अब सहन नही होता जल्दी से दिखा दो।
अक्सर आप कहानियां व किस्से सुनाते गांव के,
जिन्हे हम सुनते थे बड़े चाव से।
कैसे होते होगे दिन-रात भी गांव के,
कसम है आपको अब तो गांव ले जाकर हमे घुमा दो।

समाप्त

सुमित.शीतल



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