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Gala Sukh Gya Hand-Pump ka

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28 -Jan-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Save Water 0 Comments  3,134 Views
DINESH CHANDRA SHARMA

व्यंग कविता –
गला सूख गया हेंडपंप का |

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गला सूख गया हेंडपंप का , टप्पू जी घवराये |
बड़ी कठिनता से एक मटका , पानी लेकर आये |
हुचहुच करके हेंडपंप को , पानी सभी पिलाया |
किन्तु बूँद भर भी न उससे , पानी बाहर आया |
पहुंचे डॉक्टर के क्लिनिक पर , सारा हाल सुनाया |
नल का पानी सूखा क्योंकर , क्रम से सब बतलाया |
बोले ,” हेंडपंप है मेरा , कई दिन से बीमार |
स्वास्थ ठीक को जाये उसका , कर दीजिये उपचार |”
सारा हाल जानकर डॉक्टर , सोच समझकर बोला |
“ये तो है एक नयी समस्या “, राज एक था खोला |
“हेंडपंप का स्वास्थ ठीक है ,ये धरती का गम है |
भू भीतर जो भरा है पानी , होता जाता कम है |
रिस नहीं पता धरती भीतर , खींच रहे हम जितना |
दिन प्रतिदिन कम होता जाता ,शेष बचा अब कितना |
चूसेंगे जब इस गति से ही , पानी कहाँ बचेगा ?
एक एक कर स्रोत यहाँ का ,ऐसे ही सूखेगा |”
मात्र एक उपचार यही है , जागे जग का जन जन |
चूसे जितना रिसे भी उतना , होगा तभी संतुलन |
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