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गर तुम

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31 -May-2022 Rambabu Tiwari Bewafai Poems 0 Comments  54 Views
गर तुम

गर तुम यूँ मुख मोड़ न गए होते
तुम हमारे और हम तुम्हारे होते
कितनो का चाँद होगा तू पर
मेरी तो पूरी दुनिया ही तुम होते
गर तुम यूँ...........
तेरी ही खुशबू से महकती मेरी साँसे
भीगा भीगा सा एहसास दिलाते
रूह से रूह में सिमट ही जाते
ज़िस्म मेरा होता पर जान तुम होते...
गर तुम यूँ......
हर पल तुझे महसूस करते
दिल के पूरे सारे अरमान भी होते
तेरे लबो को लबो से छूते
मेरी सुबह और शाम भी तुम होते..
गर तुम यूँ.....
पर अब फासले ही फ़ासले है
ख़ामोश सुबह है और शाम भी खामोश है
रौशन हमारी भी महफ़िल होती
यूँ ही  गर्दिश में सितारे न होते



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