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Garib-Rashan/ गरीब राशन

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15 -May-2020 shalu L. Life Poem 0 Comments  125 Views
Garib-Rashan/ गरीब राशन

गरीब- राशन

गरीब तेरा घर बहोत दूर है
सरकार के महल से
मंहगा पड़ेगा अब तो
राशन भी भूख से।

क्या बाटे गरीब तेरा हिस्सा दुकानदार
जिसके आने से पहले हुए हिस्से हजार।

राशन तेरे नाम से निकलता
रास्ते मे कितनो का हिस्सा बनता
पैसो का घाट तेरा संकरा है
शायद इसीलिये तेरे नसीब में
राशन कंकड़ मिट्टी का कचरा है।



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