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गर्म हवाएं

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28 -Feb-2020 Abbas Bohari Patriotic Poems 0 Comments  370 Views
Abbas Bohari

ये कौन फ़ैला रहा नफ़रत का ज़हर
अनगिनत मासूमों पर ढा रहा क़हर

ये कठमुल्ला ये पूँजीपती ये भ्रस्ट अफसर
सियासत के दलाल मुखौटोंमें छिपे अक़्सर

मज़हब नही सिखाता करना किसीसे बैर
गर तोड़े जात पातकी दीवारें नही हुई देर

हो गीताका ज्ञान या क़ुरआन की तफ़्सीर
हर धर्मग्रंथमें बसी बस मोहब्बतकी तासीर

दो आवाज़ हम एक है इस मुश्किल सफ़र
चलना है जब सबको आख़िर एकही ड़गर

मिलकर कर दो गर्म हवाओंका खत्म असर
बस इंसान बनकर दिखानेमे ना छोड़ो कसर

सत्य और अहिंसाकी राहपर मचे ऐसा शोर
अब्बास भी देख ले वो अमनकी सुहानी भोर



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