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गौरैया

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28 -Mar-2020 Suresh Chandra Sarwahara Birds Poem 0 Comments  161 Views
Suresh Chandra Sarwahara

गौरैया
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अन्धाधुन्ध विकास से, गौरैया हैरान।
अपने पूर्ण विनाश का, लगा रही अनुमान।।
*
जंगल कट कर बन गए बहुमंजिल के फ्लैट।
गौरैया के घोंसले, करते मटियामेट।।
*
दूषित जल विषमय हवा, नहीं अन्न तरु ठूँठ।
जाना ही था एक दिन, गौरैया को रूठ।।
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गौरैया है चाहती, रहे मनुज के पास।
लेकिन मानव छीनना, उसके नित्य निवास।
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खुश रहती हर हाल में, कितनी है जीवन्त।
गौरैया को लग रहे, बारहमास बसन्त।।
*
चीं चीं कर फुदकी फिरी, आँगन में कुछ देर।
गौरैया बन आ गई, ज्यों बेटी पगफेर।।
*
जब से गौरैया गई, सूूना है दालान।
चूँ चूँ के स्वागत बिना, रूठा लगे विहान।।
*
- सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा'
3 फ 22 विज्ञान नगर,
कोटा - 324005 (राज.)
मोबाइल :9928539446



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