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Geeta Saar (Aalha Chhand)

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02 -Dec-2016 Ram Vallabh Acharya War Poems 0 Comments  1,483 Views
Ram Vallabh Acharya

गीता - सार
(आल्हा छंद में)

कौरव पाण्डव की सेनायें
खड़ी हो गईं सम्मुख आय ।
कुरूक्षेत्र में रण को आतुर
अनगिन योद्धा पड़े दिखाय ॥

महावीर रणधीर बाँकुरे
नाना भट प्रतिभट बलवान ।
अस्त्र शस्त्र आयुध भूषण ले
धाये महासमर मैदान ॥

महारथी बलवीर सयाने
पैदल, घोड़ा-गज असवार ।
इक से एक शक्ति में भारी
लड़ने मरने को तैयार ॥

काका- बाबा- मामा- नाना
भाई- भतीजा अरु गुरुराय ।
इन पर कैसे शस्त्र उठाऊँ
मोह भयो अर्जुन मन माय ॥

सारथि बने कृष्ण तब बोले
युद्ध करो निज शस्त्र उठाय ।
आकर मेरी चरण शरण में
कर्म करो फल को बिसराय ॥

हानि - लाभ, जय और पराजय
सुख - दुख जानो एक समान ।
करो भक्ति, लो आश्रय मेरा
योग क्षेम मैं करूँ प्रदान ॥

जैसे प्राणी वस्त्र बदलते
जीव बदलता है निज काय ।
आत्मा अजर अमर अविनाशी
घट घट में मैं रहा समाय ॥

प्रभु ने रूप विराट दिखाया
दिया धर्म का मर्म बताय ।
मोहपाश काटे अर्जुन के
गीता का उपदेश सुनाय ॥

Geeta Saar (Aalha Chhand)


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