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घन  घोर अँधेरा छाया है

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19 -Apr-2020 Sandeep Kumar City Poems 0 Comments  231 Views
घन  घोर अँधेरा छाया है

घन घोर अँधेरा छाया है
जिसने हम सबको घेरा है
कुछ नज़र आता ही नहीं
कुछ समझ आता ही नहीं
कोई राह सुझाता ही नहीं
कोई भेद बताता ही नहीं
कोई जान पाता ही नहीं
क्या अब होने वाला है
कैसा ये समय निराला है
कैसा ये बदल छाया है
क्या प्रलय पूर्व की माया है
क्या कोई घोर संकट है
मानव मिटने को अग्रसर है
क्या कोई इसे बचाएगा
अब कौन राह दिखलायेगा
मंदिर बंद शिवाले बंद है
अब तू किसका द्वार खटकायेगा
कौन काल की मार से तुझे बचाएगा
कौन काल की मार से तुझे बचाएगा

लिखित :- संदीप कुमार
१९.०४.२०२०



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