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ग़ज़ल _ऐ _सादगी

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16 -Jan-2021 Parmanand kumar Love Poem 0 Comments  376 Views
Parmanand kumar

*********ग़ज़ल********

By Parmanand Kumar


कुछ तो बात है तेरी सादगी में सनम
वरना हम भी तुम्हारे ना होते कभी
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कुछ तो बात है तेरी सादगी में सनम
वरना हम भी तुम्हारे ना होते कभी....
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ना होते कभी.... ना होते कभी
कुछ तो बात है तेरी सादगी में सनम.....
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पतझड़ में भी जी लेंगे हम ए सनम
गर साथ हो तेरा- और मेरा मिलन..2
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कुछ बात है तेरी खामोशियों में सनम
वरना चांद तारे भी आसमा में ठहरता नहीं
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कुछ तो बात है तेरी आशिकी में सनम
वरना हम आशिक़ी ना करते सनम
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कुछ तो बात है तेरी आशिकी में सनम
वरना हम आशिकी ना करते सनम
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इश्क करता मगर ...प्यार करता मगर
इश्क करता मगर.... प्यार करता मगर
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तुम ना होती तो मैं इश्क निभाता नहीं...
तुम ना होती तो मैं इश्क निभाता नहीं....
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यह शहनाईयों की गूंज है .......
या, मेरे मिलन की रात है...2
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तू बता दे -----मेरे---- हमसफर....
ये तेरे ------मुरादों की रात है....
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अंदर, .....शबाबों की रात है
बाहर .......भींगी बरसात है..
यह कैसी ...मुलाकात है-2
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दीदार करने को तरसे---है सारी ... कायनात
चांद- तारे भी तुझको, है करते इशारे
क्या करें हम अकेले ... जिए कैसे सनम
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सबकी इशारों को... ठुकरा दो तुम
एक मेरी ही आशिकी को... अपना लो तुम
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वरना हम भी अधूरे... ही रह जाएंगे
और आशिकी का नशा... भूल जाएंगे लोग...

तुम मेरी हो... मेरी हो... मेरी हो ...जान -ए- सनम
अब कहां जाएंगे छोड़कर... तुझको ऐ -नादान ए सनम
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साथ दे ना दे तू... जहॉ तक चलेंगे
अगर हां कर दे ..जन्नत भी मिलेंगे
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ना अफसोस,होगा,ना शिकवा-शिकायत
अगर साथ देने का वादा.... करो तुम



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