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गिलहरी, Squirrel

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15 -Jul-2018 nil Animals Poem 0 Comments  1,529 Views
गिलहरी, Squirrel

दिनांक १३.०७ .२०१८ को बाल कल्याण एवम बल साहित्य शोध केंद्र में पठित बालगीत :
गिलहरी
टेर टेर कर कहे गिलहरी /बालगीत है मेरा प्रहरी
जनम जनम का मीत है
मेरा जीवन गीत है

मेरे आँगन की बगिया में /एक गिलहरी रहती
हर मौसम के तेवर नखरे /जेठ दुपहरी सहती
चीं-- चीं --चीं --चीं गाकर कहती
जीने की यह रीत है
मुझको सबसे प्रीत है

जब से मैं आई बगिया में /कान खड़े ही रहते
उठी पूँछ जब देखें मेरी /बालगीत यह कहते
बगिया का हर कण कण मेरे
जीवन का संगीत है
राम भरत सा मीत है

सोनू मोनू सब जन परिजन /मिलजुल निशिदिन रहते
जीवन में संगीत गूँजता/ बाल गीत नित रचते
पांति खडी गीतों की जैसे
खडी चींन की भीत है
अजर अमर हर गीत है
[१३.०७.२०१८]



Dedicated to
बालगीत प्रेमियों को

Dedication Summary
प्रेरणा देगी बल गीत रचने की

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