Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ॐ नीलकंठ शिव है वो

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27 -Aug-2021 Swami Ganganiya God Poems 0 Comments  158 Views
ॐ नीलकंठ शिव है वो

ॐनीलकंठ शिव है वो हर मन्दिर हर मठ में वो हर इन्सान के घट-घट मे वो समुन्द्र के हर तट पे वो हर वनस्पति के वटवृक्ष मे वो ॐ नमः शिवाय का उच्चारण अब हर इन्सान जपता है जो वह गुंज्यीमान होता है हर मन्दिर इंसान के अन्दर वो व

हम भी "माँ शबरी" बन जाएँ

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09 -Aug-2021 राकेश कुमार राठौर God Poems 0 Comments  141 Views
हम भी

हम भी “माँ शबरी” बन जाएँ भक्ति हो शबरी जैसे श्री राम जी आएँगे राम जी आएँगे अपने मन से कहती राम जी आएँगे प्रतिदिन बगिया से रंग – बिरंगे फूल ले आती राहों में उसे बिखराती आस में वह सदा रहती। शबरी की बातों को वन के सभी प

हिसाब-ए-जिंदगी

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28 -Jul-2021 Muhammad Asif Ali God Poems 0 Comments  70 Views
हिसाब-ए-जिंदगी

कल तेरा जब आएगा तू इंसान बन जाएगा अगर बीच में ही टपक गया तो जहन्नमी कहलाएगा ख़ौफ़ तुझको यहाँ दिखा दें तो भी सह न पाएगा कहाँ गुजरा है क्या बात थी कैसी महफ़िल थी कैसी रात थी हिसाब तो देगा ही सबका वक़्त को भी बतलाएगा खुल रह

...कोई और ही है।

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01 -Jul-2021 Sandeep Wadekar God Poems 0 Comments  99 Views
...कोई और ही है।

हमे लगता है, कोई हमसे मिला, लेकिन हमसे मिलवाने वाला तो, कोई और ही है। हमे लगता है, किसी ने साथ छोड़ा, लेकिन साथ छुड़ावाने वाला तो, कोई और ही है। हमे लगता है, किसी ने रिश्ता बनाया, लेकिन रिश्ता बनवाने वाला तो, कोई और ही है।

धर्म युद्ध था पर धर्म कहाँ था?

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21 -Jun-2021 Hanuman Gope God Poems 0 Comments  0 Views
धर्म युद्ध था पर धर्म कहाँ था?

धर्म युद्ध था पर धर्म कहाँ था? धर्म युद्ध था पर धर्म कहाँ था? तुम ही कहो गीता का मर्म कहाँ था? मानव हठ था, इर्शिया की गाथा थी, अहं से उत्पन्न हुई सब बाधा थी। तुम तो धर्म दूत बन आये थे, रण में तुम ही तुम बस छाये थे। तुमने प

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