Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

हर रोज सुबह उसका मुझे पैगाम आता है....!!!

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17 -Oct-2018 pravin tiwari Good Morning Poem 0 Comments  240 Views
हर रोज सुबह उसका मुझे पैगाम आता है....!!!

हर रोज सुबह उसका मुझे पैगाम आता है। अल्फाजों में ही सही प्यार बेइंतेहा आता है।। लिखती हैं पहले वो दुआ और सलाम अपना। फिर लिखावट में उसकी थोड़ा ठहराव आता है।। शर्म-ओ-हया से तब वो खुद में सिमट जाती। जेहन में जब उसके म

तू आ कर जब मुझे नींद से जगाए..........!!

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30 -Apr-2018 pravin tiwari Good Morning Poem 2 Comments  599 Views
तू आ कर जब मुझे नींद से जगाए..........!!

हर रोज सुबह ऐसी हसीन हो जाए.........! तू आ कर जब मुझे नींद से जगाए..........! तेरे भीगे गेसुओं से गिरती हुई बूंदें, मेरे चेहरे को बड़े प्यार से भिगोए...........! मैं देखता रहूं तुझे प्यासी निगाहों से, और तू शरमा के अपना चेहरा छुपाए.........!

चलो नई सुबह की, नई शुरुआत करते हैं..........!

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22 -Apr-2018 pravin tiwari Good Morning Poem 0 Comments  511 Views
चलो नई सुबह की, नई शुरुआत करते हैं..........!

चलो नई सुबह की, नई शुरुआत करते हैं..........! सपनों की नहीं आज, हकीकत की बात करते हैं..........! उदास चेहरे पर, प्यारी सी मुस्कान लाते हैं..........! हर दिल में प्यार की, एक ज्योत जलाते हैं..........! कोई खफा ना रहे हमसे, ऐसे सबको गले से लगाते ह

Din hai nikla

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15 -Apr-2018 shalu L. Good Morning Poem 0 Comments  245 Views
Din hai nikla

Din hai nikla Nikla suraj sunhari us dhup ne Kiya shringar.... .khubsurat najare saje hai najar kare didar... Badal raha hai din dekho titli chali uthane fulo ko... Panshi hai nikle safar par , ude charo dishao ko... Madam madam chali hava ehasas jaise koi chhua ho.. Din bara hai khushiyon se jaise puri hui koi dua ho... Kheton me lahare bahar ki, saje dharti hare libaj ki. .kashish Gungunati koyal sune dhun pukar ki...

सुबह की सुनहरी धूप......!!

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14 -Mar-2018 pravin tiwari Good Morning Poem 0 Comments  517 Views
सुबह की सुनहरी धूप......!!

सुबह की सुनहरी धूप, सब को जगाती हैं.......! कर्म से रोशन होगा, तेरा नसीबा.......! यह बात सबको, सिखाती है.......! कल नाकाम हुए, तो क्या हुआ.......! आज‌‌ कोशिश तेरी, जरुर रंग लाएगी.......! सिख ले कुछ तू, बहती नदी से.......! जो पहाड़ों को चीर के, अपना

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