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Dada Ji Ka Nal

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06 -Sep-2012 Praveen Agarwal Grandparents Poems 0 Comments  11,622 Views
Praveen Agarwal

दादाजी के बचपन का किस्सा अब भी याद आता है

नौ बरस के जब वो पहली बार गाँव से शहर आए थे
नल में पानी आता देख कर उन्हे ये ख़याल आए थे
ये नल अगर गाँव में होता तो कितना अच्छा रहता
तालाब का पानी खुद अपने ही घर में बहता
माँ को रोज़ एक कोस जा कर घड़े में पानी नहीं लाना होगा
पिताजी से कहकर ये नल गाँव ले जाना होगा

मैं परदेस में कई ऐसी चीज़ें देखता हूँ
जिन्हे अपनों के लिए अपने देश ले जाना चाहता हूँ

पर ये सब चीज़ें दादाजी के नल की तरह हैं,
हमें ये सारी चीज़ें अपने देश में खुद ही बनानी होंगी



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