Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Gurhal Ke Phool (Hibiscus Flower)

0
08 -Sep-2016 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 0 Comments  1,869 Views
Suresh Chandra Sarwahara

गुड़हल के फूल
___________________

कैसे सुन्दर खिले हुए हैं
बीच हरे पत्तों में गुड़हल,
जैसे जग को देख रहे हों
चंचल बालक सम मचल मचल ।
केसर के हाथों को फैला
चाह रहे झुक छूना धरती,
उँगली जैसी लाल पंखुरी
प्रातः की लाली को हरती।
कण पराग के बाहर निकले
ज्यों उल्लास हृदय का छलका,
कुमकुम रोली बिखर पड़े हों
ऐसा रंग पुष्प के दल का।
गुड़हल इतने भी ना नाजुक
जितना समझ रहे हैं हम तुम,
मौसम की सब आघातें सह
हँसते रहते ये जवा कुसुम।
आरे जैसे दाँतों वाली
पत्ती ऊपर सिर रख अपना,
देख रहे ये झूम हवा में
सब चिन्ता खो कल का सपना।
तपे आग में सोने जैसा
दिव्य रूप को धारे गुड़हल,
समा गए आँखों में मेरी
कभी नहीं होने को ओझल।

Gurhal Ke Phool (Hibiscus Flower)


Dedicated to
Hibiscus Flower

Dedication Summary
In this poem the properties and importance of Hibiscus Flower have been described.

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017