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हाँ!! मैं कवि हूँ...

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03 -Nov-2017 Thakur Gourav Singh Profession Poems 2 Comments  589 Views
Thakur Gourav Singh

अक्सर लोग है पूछते
कौन हो तुम?
क्या है तुम्हारा काम?
क्या देगा तुम्हें ये?
क्या है तुम्हारी मंजिल?
एक पल के लिए मैं सहम जाता हूँ
क्या जवाब दूँ उन्हें समझ न पता हूँ
फिर दिल में आई एक बात
हाँ! मैं हूँ कवि
दिलो को बहलाता हूँ
रोते हुए को हँसाता हूँ
खुद को खुद से मिलाता हूँ
समाज को रूबरू कराता हूँ
सही गलत का फ़र्क़ बताता हूँ
ज़िन्दगी से सामना कराता हूँ
मेरी ना कोई चाह है
ना ही कोई मंजिल है
आसमाँ मेरा छत
धरती मेरी आँगन
ये सारा जहां मेरा घर है
बस चलते जाना है
बस चलते जाना है
दर्द दिल के कोरे कागज़ में उतार देता हूँ
किसी से कुछ ना केह पाता हूँ
लोगों के बिछ चुप रहता हूँ
तन्हाई में दिल के जज़्बात रोक ना पाता हूँ।


ठाकुर गौरव सिंह
#अल्फ़ाज़❤से



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2 More responses

  • poemocean logo
    Taniya mehta (Registered Member)
    Commented on 07-November-2017

    Awesum poem.. gbu...

  • poemocean logo
    Niharika (Guest)
    Commented on 06-November-2017

    Wonderful poem Veera.....

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