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हार और जीत

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05 -May-2021 rtripathi Motivational Poems 0 Comments  275 Views
rtripathi

हर हार की हर जीत की
इस ज़िन्दगी के नीति की
है,वह भी दृढ़ी तू भी दृढ़ी
फिर क्यों डरा?है क्यों रूका?
तू भी जला अपनी अलक----

यू हार कर रूक न सही
हर पल उस संकल्प की
कर साधना उस पूर्ति की
जब है ललक तेरी एकलव्य सी
तू भी बढ़ा अपनी परिधि----

क्या संर्घष तेरा कम हुआ?
फिर सृजन क्यों रूक गया?
जब सूर्य अपने तेज से लड़ता है
तम के तूफानों से
तू फिर यू हार कर है क्यों ?रूका----

अब जीत हो अन्तिम विकल्प
रख धैर्य तू न टूट अब
यू अपनों विछुड़ कर न रूठ अब
बस सिंचता जा अपने संकल्प को
अब क्षण अन्तिम है सफलता तेरी निश्चित है।

ऋषभ त्रिपाठी

हार और जीत


Dedicated to
upsc student

Dedication Summary
At that cobid-19time, i want to motivate the upsc student

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