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Haathi Tha Saathi

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12 -Aug-2016 Anupama Gupta Kesharwani Animals Poem 1 Comments  1,783 Views
Anupama Gupta Kesharwani

हाथी तो था अपना साथी
अब कैसे करता बरबादी!
बस्ती में वह घुस जाता है
फसलें भी जी भर खाता है
किसने गंदी बात सिखा दी?

पहले सुंदर सैर कराता
बात-बात पर अब गुस्साता
सीधा-सादा पत्ते खाता
पर अब पटखनी दिलाता।
दाँतों ने इसकी दुनिया ली।
हाथी तो था अपना साथी--

भोलू राजा कारण सुन लो
जो कहती हूँ उसको गुन लो
मानव ने इसको मारा है
इसीलिए अब बेचारा है
इसकी जनसंख्या अब आधी।
हाथी तो था अपना साथी---

जंगल छीने,बाग उजाड़े
छीन लिए मानव ने सारे
बस्ती में घुसना मजबूरी
कहाँ जाएं हाथी बेचारे।
सब जीवों की है यह धरती
मानव ने यह बात भुला दी।
हाथी तो था अपना साथी--

Haathi Tha Saathi


Dedicated to
World Elephant Day

Dedication Summary
This poem is dedicated to world elephant day.
World Elephant Day is an international annual event on August 12, dedicated to the preservation and protection of the world's elephants.

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1 More responses

  • poemocean logo
    Jivitesh sisodia (Guest)
    Commented on 13-September-2016

    Halat ke mutabik.

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