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हड़ताल

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16 -Jan-2021 Parmanand kumar Social Issues Poems 0 Comments  119 Views
Parmanand kumar

हड़ताल ।हड़ताल।।हड़ताल।।।


1.अपनी जीत पक्की है, अपनी जीत पक्की है
विश्वास कर लिया ,हड़ताल कर लिया

2.शंखनाद ,शंखनाद ,शंखनाद कर दिया
चार लाख शिक्षकों ने हुंकार भर दिया

3.शंखनाद ,शंखनाद, शंखनाद कर दिया
चार लाख शिक्षकों ने हड़ताल कर दिया

4.अपनी मांग जायज है ,अपनी मांग जायज है
सेवा शर्त लागू करो ,सेवा शर्त लागू करो
समान काम के बदले समान वेतन लागू करो

5.ऐ नीतीश कुमार जी गुरुओं का सम्मान करो, गुरुओं का सम्मान करो
साथियों विश्वास कर, मिलजुल हड़ताल कर
साथियों विश्वास कर, मिलजुल हड़ताल कर
गृह मोह त्याग कर, सब चले हड़ताल पर

6.ना गोली से ,ना बम से ,नियोजितों अपने दम से
कुंभकर्णी निद्रा में ,सो रही सरकार से लड़ चलें, बढ़ चले ,अपने हक के लिए
7.अपना खुद सम्मान कर ,अपना खुद सम्मान कर
चलो चलें हड़ताल पर ,चलो चले हड़ताल पर


8.शंखनाद ,शंखनाद ,शंखनाद कर दिया
अपनी जीत पक्की हो, संकल्प कर लिया
साथियों धिक्कार है , सरकार का तुगलकी फरमान है

9.निर्बंश _ निर्बंश_ निर्बंश हो गया
जो गुरु से लड़ लिया, निर्बंश हो गया

फिर क्यों डरे,जब एक चाणक्य थे लरे
चार लाख चाणक्य के संग ,जब बिहार है लड़ पड़े


10.हुंकार, हुंकार ,हुंकार भर दिया
चार लाख शिक्षकों ने,हड़ताल कर दिया

Parmanand kumar
Teacher
Andharatharhi BRC
20.02.2020



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