Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

हर शाम की तरह आज भी.. (Har sham ki tAraha aaj bhi)

0
24 -Mar-2016 Himanshu dubey Love Poem 0 Comments  1,384 Views
Himanshu dubey

हर शाम की तरह आज भी कही,संग चले थे हम।
हर शाम की तरह आज भी कही,दूर निकले थे हम।।
कदमो के संग धड़कन मिलाते,
मेरे अक्स मैं कही चुप से जाते|
कभी आगे कभी पीछे,
कितने रंग दिखाते हो तुम।|
मैं देखु कभी चाँद तो कभी तुम को,
आसमाँ ज़मी पे ले आते हो तुम।
जब चलते चलते करीब आ जाते हो,
ऐ खवाब हकीकत बन जाते हो तुम।
मैं रुक जाता हु उस झील के किनारो पे ही,
दूर कमल पे ठहरी शबनम बन जाते हो तुम।
हर शाम की तरह आज भी बस,चलते रहते हैं हम,
राहे भूल जाते हैं अपनी,और मंजिल बन जाते हो तुम,
हर शाम की तरह आज भी,इक एसी जमी पे थे हम,
हर शाम की तरह आज भी,रिवाजो से परे थे हम
हर शाम की तरह आज भी कही,संग चले थे हम।
हर शाम की तरह आज भी कही,दूर निकले थे हम।।
हिमांशु दुबे ‘मिराज’



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017