Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

हर तारीख पुरानी

0
29 -Aug-2016 anupam chaubey Memories Poems 0 Comments  594 Views
anupam chaubey

हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है
न भूल सका अभी एहसास दिला जाती है
हर बार मेरा इतिहास मेरे आज से जीत जाता है
घंटों मुझे गहराई में डूबा जाती है
हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है.

जब घटा तो न था पता इतना सताएगा ये पल
कि इतनी मुश्किल होगी कोई ढूँढने में हल
सारे मंजर के सामने नजर थम सी जाती है
उस लम्हे को अरसे बाद भी करीब पाती है
हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है.

कोई अहम् बात से न है इसका वास्ता
न कोई एक है हर एक इसका राश्ता
ये तो हर एक घड़ी का हिसाब थमा जाती है
कई आम हस्ती को खास बना जाती है
हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है.

इतना अजीज न था जो मेरे अतीत में
वर्तमान में वो भी है मेरे प्रतीत में
जाने कब कौनसी घटना रुला जाती है
मुझे अधूरे होने का फरमान सुना जाती है
हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है
कल को अभी से बेहतर हर बार बता जाती है.



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017