Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैं कान्हा मैं मोहन..

0
विनोद सिन्हा-

मैं कान्हा मैं मोहन....!!

मैं नटखट मैं गोपाला.!
मैं कान्हा मैं माखनचोर.!!

मैं देवकी पुत्र मैं यशोदा नंदन.!
मैं वासुदेव मैं नंदकिशोर.!!

सूरत मेरी भोली भाली.!
चंचल चितवन मीठी वाणी ठोर.!!

मैं गिरधारी मैं बनवारी.!
मैं मोहन कहते मुझको चितचोर.!!

पांव खड़ग देह पीताम्बर पहनूँ.!
माथ मुकुट मेरे सोभे पंख मोर..!!

मुरली धर भी है नाम मेरा.!
बजाऊँ मुरली मैं शाम और भोर.!!

रास रचाऊँ संग गोपियन के मैं.!
राधा रहती हरदम पकड़े मेरी डोर.!!

बसता राधा के कण कण में ही मैं.!
मीरा रखती मुझको बिठा सिरमौर.!!

एक रहती हरदम संग संग मेरे.!
एक रहती जपती नाम मेरा हर छोर.!!

देख एक को नेत्र सजल हो जाते.!
होता देख दूजे को मन भाव विभोर.!!

मैं माधव मैं मधुसूदन.!
लक्ष्मीकांत मैं श्यामसुंदर.!!.

मैं द्वारकाधीश मैं रघुनंदन.!
मैं ज्ञानेश्वर मैं सर्वेश्वर.!!

यत्र तत्र सर्वत्र बसा मैं
न ठिकाना न कोई ठौर
मैं हीं विष्णु मैं हीं विश्वरूपा
मैं हीं वैकुंठ कर लो गौर.!!

मैं कान्हा मैं माखनचोर.!
मैं मोहन,मैं चितचोर.!!

विनोद सिन्हा "सुदामा"



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017