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हिन्द की बेटी

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23 -Jan-2020 Vaishno Khatri Mothers Day Poem 0 Comments  249 Views
हिन्द की बेटी

हिन्द की बेटी

हूँ मैं हिन्द की बेटी, बनी रहूँगी, सारे विश्व की सरताज़।
भारत बना अनुपम, स्वर्ण-विहान का अग्रदूत है आज।

अबला न समझो मुझको असीम शक्ति की हूँ भण्डार।
कमला बन कल्याण मैं करती दुर्गा बन करती संहार।
शांति-क्रांति, समृद्धि-वृद्धि, श्री सिद्धि भी हूँ मैं आज।
हूँ मैं हिन्द की बेटी बनी रहूँगी सारे विश्व की सरताज़।

बेटी हूँ निज गौरव पहचान मान-सम्मान मैं पाऊँगी।
पहले थी विश्व विख्यात अब फिर से मैं हो जाऊँगी।
मैं स्वयं ही महाशक्ति किसी की नहीं रहूँगी मोहताज़।
हूँ मैं हिन्द की बेटी बनी रहूँगी सारे विश्व की सरताज़।

आकर पतझड़ को वसन्त में परिवर्तित कर जाऊँगी।
कर अपूर्व कार्य भारत का नाम रौशन कर जाऊँगी।
मैं रामायण व गीता रूढ़ियों के बन्धन तोड़ूँगी आज।
हूँ हिन्द की बेटी बनी रहूँगी सारे विश्व की सरताज़।

हिन्द की बेटी


Dedicated to
नारी

Dedication Summary
नारी है तो संसार है। इसमें सारे देवताओं का सार समाया हुआ है। ममता, सहनशीलता और बलिदान की देवी है।

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