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हिन्दी/ Hindi

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13 -Sep-2018 Suresh Chandra Sarwahara Mother Tongue Hindi Poem 0 Comments  284 Views
Suresh Chandra Sarwahara

हिन्दी
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हिन्दी केवल नहीं हमारे
भावों की अभिव्यक्ति,
यह तो है जीवन की ऊर्जा
प्राणों की है शक्ति।
देती आई राष्ट्र - एक्य को
एक यही आधार,
भारत के भाषा - पुष्पों का
यही पिरोती हार।
एक सूत्र में जोड़ रही है
यह सारा ही देश,
इसको बोलें तो लगता है
महका - सा परिवेश।
हो आदर से भरा हमारा
हिन्दी के प्रति भाव,
ना दें अपने व्यवहारों से
हम हिन्दी को घाव।
पढें लिखें बोलें हिन्दी में
हो हिन्दी का मान,
अखिल विश्व में हो गुंजारित
हिन्दी का जयगान।
*****
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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