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Holi ke rang

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06 -Mar-2015 indra jain Holi Poems 0 Comments  1,356 Views
indra jain

बिना makeup के शर्मा जी की बीबी को देखा ,
ना पहचानते हुए एक ज़बरदस्त जुमला फेंका।
वो शरमाते हुए बोली -आप भी कमाल करते हो ,
अपनी भाभी तक को भी नहीं बख्शते हो।

होली पर फिर से शर्मा जी की बीबी दिखाई दी ,
इस बार वो पूरी तरह से रंगों में नहाईं थी।
अचानक ही मुंह से फिर वही जुमला निकल गया ,
लेकिन इस बार भाभी जी का सैंडल चल गया।

होली भी ना जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है
किसी की बीबी किसी के साथ रंग खेल जाती है।
पति भी मौके का भरपूर फायदा उठाते हैं ,
होली है -कहकर किसी के भी गाल रंग आते हैं।

होली के दिन सबका तन मन रंग जाता है ,
हर कोई रंगों में सराबोर नज़र आता है।
बेरंग सी ज़िंदगी को खुशियों के कुछ पल दे जाता है,
दोस्त हो या दुश्मन ,सबको एक कर जाता है।

ढोल की थाप और भांग का अलग ही रंग जमता है ,
भांग के नशे में किसी का भी पैर नहीं थमता है।
होली का यह त्यौहार जब जब भी आता है
सड़कों पर ही नहीं ,दिलों पर भी छाप छोड़ जाता है।

Holi ke rang


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