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Kaise Aaj Manau Holi

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16 -Mar-2014 Jaijairam Anand Holi Poems 0 Comments  1,573 Views
Jaijairam Anand

जीर्ण शीर्ण बहनों की चोली
मुंह बाए जनता की झोली
घर से दूर कमाने रोटी
निकल पड़ी श्रमिकों की टोली
कैसे आज मनाऊँ होली

गांधी के आदर्श खो गए
सारी सपने चूर हों गए
नेता कफ़न कमीशन खाते
पद मद में बेहोश हों गए
कैसे आज मनाऊँ होली

रोहिताश्व का शव नंगा है
दानवता का दल चंगा है
कर्फ्यू है हसने गाने पर
खारा नीर भरी गंगा है
कैसे आज मनाऊँ होली

जहाँ तहां जल रही होलियाँ
निरपराध खा रहे गोलियाँ
जन मॉल खतरे की घंटी
चमड़ी पर लग रहीं गोलियाँ
कैसे आज मनाऊँ होली



Dedicated to
जंन गन मन

Dedication Summary
यह जन गीत है

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