Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Tewari

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09 -Aug-2022 rameshraj Human Being Poems 0 Comments  110 Views
Tewari

*तेवरी* ********* सुलझाने बैठें क्या गुत्थी जब इसका ओर न छोर। हर ओर।। करनी थी जिन्हें लोकरक्षा बन बैठे आदमखोर।हर ओर।। सड़कों पे पउआबाज़ दिखें लम्पट-गुण्डों का शोर।हर ओर।। सद्भावों की नदियां सूखीं अब ग़ायब हुई हिलोर।हर ओ

मैं क्या करूॅ?

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05 -Aug-2022 Ravi Human Being Poems 0 Comments  149 Views
मैं क्या करूॅ?

कोई बता दे मुझे, कि मैं फेल करूॅं या पास करूॅं। फेल करता हूॅं तो, घर के तानों से घबराता हूॅं। पर शादी बर्बादी से, बच जाता हूॅं। कोई बता दे मुझे, कि मैं फेल करूॅं या पास करूॅं। कोई बता दे मुझे, कि मैं फेल करूॅं या पास कर

"स्वभाव का रुप"

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30 -Jun-2022 Ravi Human Being Poems 0 Comments  211 Views

मनुष्यों में तो भिन्नता का है प्रबल प्रवाह, रंग-रुप से आकर-प्रकार तक में है बेपनाह। इसे संगृहीत करना होगा एक बड़ी फतह, संकलित हो यह बनेगा एक ग्रंथ की तरह। इनमें से सिर्फ स्वभाव में ही है अजीब बात, जो सिमट जाती है ती

परवाना मदहोश है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Human Being Poems 0 Comments  122 Views
परवाना मदहोश है।

परवाना मदहोश है खुद ही जल जानें को। चिरागों को इल्जाम ना देना वो है उजाले को।। आज फिर बच्चे भूखे सो गए लोरी सुनकर। ए खुदा पाक रहम कर दो ऐसी जिंदगियों पर।। कड़ी धूप में साया भी साथ छोड़ देता है। बुरे वक्त में कभी-कभ

कुछ भी एक सा ना होता है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Human Being Poems 0 Comments  120 Views
कुछ भी एक सा ना होता है।

कुछ भी एक सा ना होता है। कभी अच्छा तो कभी बुरा होता है।। बडी देर से आवाज आ रही है। जाकर देखो बच्चा क्यों रोता है।। कहीं ना कहीं सबका मुकाम होता है। बिन घोंसले का परिंदा ना होता है।। आकीद ना करना उसकी बात का। बुरा इन

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