Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

परवाना मदहोश है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Human Being Poems 0 Comments  84 Views
परवाना मदहोश है।

परवाना मदहोश है खुद ही जल जानें को। चिरागों को इल्जाम ना देना वो है उजाले को।। आज फिर बच्चे भूखे सो गए लोरी सुनकर। ए खुदा पाक रहम कर दो ऐसी जिंदगियों पर।। कड़ी धूप में साया भी साथ छोड़ देता है। बुरे वक्त में कभी-कभ

कुछ भी एक सा ना होता है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Human Being Poems 0 Comments  85 Views
कुछ भी एक सा ना होता है।

कुछ भी एक सा ना होता है। कभी अच्छा तो कभी बुरा होता है।। बडी देर से आवाज आ रही है। जाकर देखो बच्चा क्यों रोता है।। कहीं ना कहीं सबका मुकाम होता है। बिन घोंसले का परिंदा ना होता है।। आकीद ना करना उसकी बात का। बुरा इन

सबकी जुदा होती जिंदगानी है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Human Being Poems 0 Comments  45 Views
सबकी जुदा होती जिंदगानी है।

कोशिश तो बहुत की सुनने की। पर सुन ना पाए बड़ी दर्दे कहानी है।।1।। कोई नई बात बताओं हमें तुम। यह बात तो बड़े पहले की पुरानी है।।2।। हाथ पीले कर दो बिटिया के। वो तो हो गयी देखो अब सयानी है।।3।। सड़क पे नही लाते यूं झगड

मतलब पे टिके ये लोग किस किसका एहसान चुकाएँगे

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03 -Feb-2022 The KY Human Being Poems 0 Comments  63 Views
मतलब पे टिके ये लोग किस किसका एहसान चुकाएँगे

मतलब पे टिके ये लोग किस किसका एहसान चुकाएँगे, पहले पेड़ काट कर ये घर बनाएंगे, फिर दिखावे के लिए के लिए ये उस में चार गमलो में पौधे लगाएंगे, मतलब पे टिके ये लोग किस किसका एहसान चुकाएँगे, काट हिरण वन के, उनके सींघ घर में

चतुष्पदी

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18 -Jan-2022 nil Human Being Poems 0 Comments  83 Views
चतुष्पदी

मैं त्रस्त हूं नहीं स्वयं की त्रसा से, मैं व्यथित हूं नहीं स्वयं की व्यथा से। व्यथित नर नारी के आंसू बटोरता, रचता हूं नित नया उनकी कृपा से।।

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