Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Ek Kahani 2

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09 -Apr-2019 Shayar Bhai HS Human Being Poems 0 Comments  187 Views
Ek Kahani 2

Ek kahani:- Mai wo kahani keh jaunga, Apni hi jubani keh jaunga , Tm kahoge:- Ye kya keh diya tmne ... Ye kya kr diya hmne... Tut gaye apne sare sapne... Man ki baat reh gayi manme... Ki kya tha esa kash unme... Aaur nai tha wo hmme... Kyon judai ki ye khani hui... Kyon milne ki ye khudai hui... Ban ke chub rahe ab Sari baten jaisi hon koi sui... Aur Jakhm pe nahi lagana wala koi rui... Etne me ek ahat hui ... Ek insan tha koi ... Jisse dekhi na gai wo royi... Uske man me ek hor hui... Wo smjh gaya sari baton ko bin bataye... Kin kin ne the sat

क्या बुरा काम किया ?

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15 -Mar-2019 सुमित.शीतल Human Being Poems 1 Comments  239 Views
क्या बुरा काम किया ?

कविता: क्या बुरा काम किया ? हमने रोते हुए को हंसाने का प्रयास किया, तो ये नेक काम करके क्या बुरा काम किया। नफरत ही जिनका दीन-ईमान था, उनको प्यार करना सिखाकर क्या बुरा काम किया। ऐसे तो पहले भी मर-मर कर जीते थे कुछ लोग,

शांति की खोज में

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07 -Mar-2019 Babulal Pareek Human Being Poems 0 Comments  91 Views
शांति की खोज में




मैं कौन हूँ

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03 -Mar-2019 Divya Raj kumar Human Being Poems 0 Comments  143 Views
मैं कौन हूँ

उगते सूर्य की प्रथम किरण हूँ ढलते सांझ की गोधुली बेला हूँ अतृप्त अभिलाषाओं की सृजन हूँ अमावस्या के अन्धकार में चाँदनी हूँ बसंत की हल्की ब्यार हूँ धूप के तपिश में शीतल छाव हूँ श्रावण की बरसती फुहार हूँ ओस की बूंद

खिड़की

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02 -Mar-2019 Suresh Chandra Sarwahara Human Being Poems 2 Comments  223 Views
खिड़की

आओ घर की खिड़की खोलें। बाहर कितने घर हैं सुन्दर लोग बसे हैं जिनके अन्दर, चौपाये चलते धरती पर पंछी उड़ते पर फैलाकर। संग इन्हीं के कुछ पल डोलें, आओ घर की खिड़की खोलें। देखो वह बच्चा रोता है कौन वहाँ भू पर सोता है, कित

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