Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

अपनाघर

0
10 -Feb-2021 bharat Human Being Poems 0 Comments  42 Views
अपनाघर

भरतपुर राजस्थान में लावारिस, शारीरिक एवं मानसिक अस्वस्थ लोगों की देखरेख हेतु संचालित “अपनाघर” का अवलोकन किया तो ये कविता लिखी:- “अपनाघर” मावस के घुप्प अंधेरे में, रोती आवाजें आती हैं… बिन कपड़े रिसती देहों को ज

मानव हो मानव रहो

0
15 -Jan-2021 Parmanand kumar Human Being Poems 0 Comments  110 Views
मानव हो मानव रहो

१:इंसान इंसान ना रहा यमराज बनते जा रहा यमलोक भी शरमा रहा भगवान भी घबरा रहा अब क्या करूँ इंसान का मेरा पद भी संभाल रहा! २:वो दिन भी अजीब थे नग्न वेश में, इंसान थे काल भी पाषाण थे पत्थर भी भगवान थे! ३:अब दिन वो गुज़र गया म

जय जवान जय किसान

0
14 -Jan-2021 Harpreet Ambalvee Human Being Poems 0 Comments  295 Views
जय जवान जय किसान

देश में एक नेता महान हुआ है, तन, मन, धन से जो देश के लिए जीया है, ऐसा लाल बहादुर, जो देशवासियों को समझा, और देश की नींव को दी एक अमर नारे से पहचान, जय जवान जय किसान, एक देश की सरहदों की सदा रक्षा करता, दूसरा भूख मिटाने सबक

पर्दानशीन रहते हैं तो देखेगा कौन

1
11 -Jan-2021 bharat Human Being Poems 0 Comments  40 Views
पर्दानशीन रहते हैं तो देखेगा कौन

पर्दानशीन रहते हैं तो देखेगा कौन.. अलमारी में बंद किताब को पड़ेगा कौन.. जब साझा ही नही करोगे खैरियत अपनी, तो दिल मे छुपे दर्द को समझेगा कौन.. कुछ लम्हे तो निकालो बस खुद के लिए, ओरों के लिए तो कब तक रहोगे मौन.. भारत मत सोच

आँसू की कुछ बूंदों के ऋण

1
13 -Dec-2020 Dr. Archana Tirkey Human Being Poems 0 Comments  551 Views
आँसू की कुछ बूंदों के ऋण

यह सच ही तो है दिल के उद्गम से आँखों के विस्तार तक एक निर्झरिणी प्रवाहित होती रहती कभी खुशी कभी दर्द में भींगी अश्रु - नीर से लबालब भरी परन्तु हैं कुछ इंसान ऐसे भी जिनके पलकों पर रुक कर गुम हो जाती है बहती नदी बूंदे

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017