Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

काफिर न हिन्दू न मुसलमान होता है...!!!

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10 -Dec-2018 pravin tiwari Human Being Poems 0 Comments  173 Views
काफिर न हिन्दू न मुसलमान होता है...!!!

काफिर न हिन्दू न मुसलमान होता है.....! जो इंसानियत को न समझे, वो कहां इंसान होता है.....! बात करते हैं जो धर्म और जिहाद की, उनमें न गीता न कुरान का ज्ञान होता है.....! ईश्वर और अल्लाह ने तो न फर्क किया इंसानों में, जो इंसान को इ

JAAN JARA KHUD KO / जान जरा खुद को

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30 -Oct-2018 shalu L. Human Being Poems 0 Comments  226 Views
JAAN JARA KHUD KO / जान जरा खुद को

जान जरा खुद को जाने क्या बात है दिल जान न पाए करे क्या इस बात पर ख्याल रुक जाये बस जरा सोच को रोको पल वही अपना है मिलना होगा खुद से और सब भूल जाये। धीमे धीमे साँस चले मध्यम माद्यम हवा चले प्राकृति की बात सुने अपनी मस

मन की बातें लिख देता हूं.....!!!

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28 -Oct-2018 pravin tiwari Human Being Poems 0 Comments  40 Views
मन की बातें लिख देता हूं.....!!!

नज़रें, चेहरा और फितरत मैं, सबकी पढ़ लेता हूं....! कौन कहेता है की मैं, सिर्फ कविता ही लिख लेता हूं....! उन्हें भी गले लगा लेता हूं, जो मुझसे खफा रहते हैं....! मुस्कुरा कर दिलों की सारी, मैं रंजिशे मिटा देता हूं....! बड़े बुजुर्

औरत तेरे कितने रूप

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27 -Oct-2018 Naren Kaushik Human Being Poems 0 Comments  47 Views
औरत तेरे कितने रूप

औरत तेरे कितने रुप, सबसे ऊपर मां स्वरुप। नौ माह जब लहू से सींचे तब पाएं बच्चा स्वरूप। औरत तेरे कितने रुप, सबसे ऊपर मां स्वरुप। मां का कलेजा तब रोता है जब कोई बच्चा रोता है, मां को कितनी खुशी मिलती है जब बच्चा पग पहला

कुछ ऐसा भी / kuchh esa bhi

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28 -Sep-2018 shalu L. Human Being Poems 0 Comments  212 Views
कुछ ऐसा भी / kuchh esa bhi

कुछ ऐसा भी अपनों की जरुरत ही, अपनों से खफा कर कर जाती है कभी कभी मुश्किल में गैरों से भी सराह मिल जाती है .. कौन किसका कितना अपना है, वक्त से , रिश्तों की पहचान दुनिया करवाती है कही तो जानकर सारे राज तुम्हारे, एक बात की

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