Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Prem ko base rahane do dilon men

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23 -Dec-2019 Harjeet Nishad Human Being Poems 0 Comments  126 Views
Prem ko base rahane do dilon men

Phool gulab ka diya jin hathon ne, Un per kabhi kahar mat barsana. Prem ko base rahane do dilon men, Ise door hargij na bhagana. Prem nam hai permatma ka, Prem ko yun hi na gavan dena, Prem jinda hai to insaniyat bhi jinda hai, Nahin isko kabhi bhi dilon se mitana. Dharati parmatma ne das bees nahin, Keval ek hi hai banai. Khane peene jeene ki tamam cheejen, Bhi isi prabhu ne hain banai. Shukra gujar raho insanon sada, Sirjanhar is permatma ka, Kisi insan ne nahin banaya , Khuda nen hi hai sari khudai banai. Yuva amanat hain khuda ki, Yuvaon ko

क्यो और किस बात का गुमान है तुझमे

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20 -Jul-2019 Vikash Varnval Human Being Poems 1 Comments  638 Views
क्यो और किस बात का गुमान है तुझमे

क्यो और किस बात का गुमान है तुझमे मत भूल, किसी और की दी हुई जान है तुझमे डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेशन ये सब तूने कर लिया इंसानियत का भी पाठ है, क्या तूने इसे पढ़ लिया? पर्सनॅलिटी डिव्ल्पमेंट, मॅनेज्मेंट जाने क्या

Soch musafir

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19 -Jul-2019 shalu L. Human Being Poems 0 Comments  253 Views
Soch musafir

सोच - मुसाफिर राहों में हर पल सफर के, जिंदगी मुसाफिर काट रहा है हर मोड़ पर मुकाम में सफर के, अपनी सोच मुसाफिर बदल रहा है मंजिल दीवारों से नहीं बनती है, महेनत के पग पर मिलती है, चलता जा दिशाओं में भोर तू कदमों की छाप जमी

Bol jate hai/बोल जाते हैं।

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02 -Jul-2019 Human Being Poems 0 Comments  492 Views
Bol jate hai/बोल जाते हैं।

shalu L bol jate hai / बोल जाते हैं। कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं। जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं। कटा जब शीश सैनिक का तो हम खामोश रहते हैं। कटा एक सीन पिक्चर का तो सारे बोल जाते हैं। नयी नस्लों के ये बच्चे

उड़ान

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28 -Apr-2019 Naveen Kumar Human Being Poems 0 Comments  194 Views
उड़ान

माँ मुझे भी पंख लगा दो, मैं भर सकूँ उड़ान । मजहब की सीमा से बाहर, ढूँढ़ सकूँ ईन्सान ।। रब ने मानव जाति बनाई, नाम उसे ईन्सान दिया । आपस में हम साथ रहें, बस मानवता पहचान दिया ।। मजहब की गलियारों में हम, भुला चुके अपनी पह

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