ढूंढती उसकी नजर

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21 -Oct-2017 Saroj Human Being Poems 0 Comments  8 Views
ढूंढती उसकी नजर




दिल ने कही दिमाग़ से...

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08 -Oct-2017 Shah Asad Nafis Human Being Poems 0 Comments  58 Views
दिल ने कही दिमाग़ से...

ख़ुद से मैंने एक रोज़ यह सवाल किया जहाँ में क्यूँ ना रब ने मुझे लाजवाब बनाया ? मिला जवाब के तस्वीर खाना है दुनिया चाहत से उलटी,थोड़ी सी अजीब है दुनिया कहीं क़रीब था यह गुफ़्तगू दिल ने सुन ली पूरे देह में आम हुई अंग अ

Bhul gaya hai tu /भूल गया है तू

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18 -Sep-2017 shalu L. Human Being Poems 0 Comments  89 Views
Bhul gaya hai tu /भूल गया है तू

भूल गया है तू बचपन के वो हसीं लम्हें जीना भूल गया है तू , नदिया किनारे बैठ के पत्थर फेकना भूल गया है तू , छिपन छिपाई खेल के नियम भूल गया है तू, तारो की रात में खुले आसमान तले सोना भूल गया है तू, चलती रेल के डिब्बों को गि

मानवता ही है सच्चा धर्म

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01 -Sep-2017 PAWAN Human Being Poems 0 Comments  117 Views
मानवता ही है सच्चा धर्म

मुंबई शहर में बारिश के पानी के कारण बुरा हाल बना हुआ है उसको ध्यान में रखते हुए जो मानवता का नज़ारे दिख रहे है उसपर थोड़ी रोशिनी डालते हुए , आशीर्वाद देना . चीख चीख पुकार रही है मानवता हर इंसान को , चीख चीख कह रही है सबक

Me naman karta hu unko

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31 -Aug-2017 vishal ramnani Human Being Poems 0 Comments  101 Views
Me naman karta hu unko

कविता -मैं नमन करता हू उनको मै नमन करता उनको जिनने लिखी जगत कहानी रचना का स्तर भी कभी तुम देखो सर से पाव तक हर अंग को लेखों आश्चर्य करोगे तुम कैसे बना ये प्राड़ी मैं नमन करता हु उनको जिसने लिखी कहानी 1 धुन में सब कुछ क

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