Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

चतुष्पदी

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18 -Jan-2022 nil Human Being Poems 0 Comments  10 Views
चतुष्पदी

मैं त्रस्त हूं नहीं स्वयं की त्रसा से, मैं व्यथित हूं नहीं स्वयं की व्यथा से। व्यथित नर नारी के आंसू बटोरता, रचता हूं नित नया उनकी कृपा से।।

मेरा गाँव एक आबाद दुनिया है

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24 -Dec-2021 Vikram Human Being Poems 0 Comments  87 Views
मेरा गाँव एक आबाद दुनिया है

मेरा गाँव एक आबाद दुनिया है दो तीन बिल्लियाँ अक्सर ही रहती हैं उसमें वे दबे पाँव चलती दिखती रहती हैं तो कभी भागती हुईं पाँच सात कुत्तों की संख्या भी अक्सर रहती है वे भौंकने के अलावा धूप सेंकते हैं सर्दियों में और

हर गली शहर की।

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14 -Dec-2021 ताज मोहम्मद Human Being Poems 0 Comments  61 Views
हर गली शहर की।

क्या कोई भी शहादत ना बनी गरीब के खून की। मिलती नही है कीमत उसके पसीने के बूंद की।।1।। दर-दर भटकता रहता हूं आजकल यहाँ से वहाँ। क्या कोई भी नसीहत है तेरी मेरे लिए सुकूँ की।।2।। खूब जी लो तुम सब ज़िन्दगी गुनाह-ए-दौर की।

ऐ जिंदगी थोड़ी ठहर जा!

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21 -Jun-2021 Hanuman Gope Human Being Poems 0 Comments  358 Views
ऐ जिंदगी थोड़ी ठहर जा!

ऐ जिंदगी थोड़ी ठहर जा! ऐ जिंदगी थोड़ी ठहर जा, तेरी रफ्तार से घबराने लगा हूँ मैं! मन के भावों को भी थाम ले कोई, इस भटकाव से कुम्हलाने लगा हूँ मैं! वो जमाना और था, दौड़ती थी जब जिंदगी, अब तो ठहराव में सुकूँ पाने लगा हूँ मै

उदय हुआ जो पूर्वांचल में

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26 -Mar-2021 Keshav Human Being Poems 0 Comments  514 Views
उदय हुआ जो पूर्वांचल में

उदय हुआ जो पूर्वांचल में, अस्त तो होना है, क्या-क्या खोना है। कर्म भाव हो या निष्काम भाव से, संयुक्ता दोनों के परिणाम।। हार-हार नहीं जीत-जीत नहीं, फिर क्यों मन के आँगन इसे बिलोना। उदय हुआ तो अस्त भी निश्चय ,संयुक्ता

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