Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

उदय हुआ जो पूर्वांचल में

0
26 -Mar-2021 Keshav Human Being Poems 0 Comments  192 Views
उदय हुआ जो पूर्वांचल में

उदय हुआ जो पूर्वांचल में, अस्त तो होना है, क्या-क्या खोना है। कर्म भाव हो या निष्काम भाव से, संयुक्ता दोनों के परिणाम।। हार-हार नहीं जीत-जीत नहीं, फिर क्यों मन के आँगन इसे बिलोना। उदय हुआ तो अस्त भी निश्चय ,संयुक्ता

फिर रहे दर बदर भवनाएं लिए

0
25 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Human Being Poems 0 Comments  184 Views
फिर रहे दर बदर भवनाएं लिए

फिर रहे दर बदर भावनाएं लिए। तुम अपने लिए हम पराये लिए। आदमी आदमी को पहचानता कहाँ अब बड़े फिर रहे है दुवाएँ लिए। आदमी आदमी से आदमियत लिए। काश के अब मिले अच्छी नियत लिए। वो हो गया है अब गैरों का रहनुमा फिरता है ऐसी लि

अपनाघर

0
10 -Feb-2021 bharat Human Being Poems 0 Comments  128 Views
अपनाघर

भरतपुर राजस्थान में लावारिस, शारीरिक एवं मानसिक अस्वस्थ लोगों की देखरेख हेतु संचालित “अपनाघर” का अवलोकन किया तो ये कविता लिखी:- “अपनाघर” मावस के घुप्प अंधेरे में, रोती आवाजें आती हैं… बिन कपड़े रिसती देहों को ज

मानव हो मानव रहो

0
15 -Jan-2021 Parmanand kumar Human Being Poems 0 Comments  202 Views
मानव हो मानव रहो

१:इंसान इंसान ना रहा यमराज बनते जा रहा यमलोक भी शरमा रहा भगवान भी घबरा रहा अब क्या करूँ इंसान का मेरा पद भी संभाल रहा! २:वो दिन भी अजीब थे नग्न वेश में, इंसान थे काल भी पाषाण थे पत्थर भी भगवान थे! ३:अब दिन वो गुज़र गया म

जय जवान जय किसान

0
14 -Jan-2021 Harpreet Ambalvee Human Being Poems 0 Comments  709 Views
जय जवान जय किसान

देश में एक नेता महान हुआ है, तन, मन, धन से जो देश के लिए जीया है, ऐसा लाल बहादुर, जो देशवासियों को समझा, और देश की नींव को दी एक अमर नारे से पहचान, जय जवान जय किसान, एक देश की सरहदों की सदा रक्षा करता, दूसरा भूख मिटाने सबक

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017