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Aadami Aadat Se Majboor Hota Hai

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23 -Feb-2015 S.N. Sharma Human Being Poems 0 Comments  1,973 Views
Aadami Aadat Se Majboor Hota Hai

आदमी आदत से जब मजबूर होता है।
जिंदगी में हर खुशी से दूर होता है।

फिर नहीं दिखता उसे अच्छा बुरा अपना ,
वो जवानी के नशे में चूर होता है।

दूसरों को वो समझता एक तिनके सा ,
सिरफिरा खुद में बहुत मगरूर होता है।

फैसला तकदीर का वह चाहता करना ,
जो उसे हरगिज नहीं मंजूर होता है।

वक्त जब ठोकर लगाता है उसी दिन से ,
सर चढ़ा सारा नशा काफूर होता है।

कलतलक जो चल रहा था चाल अकड़ाकर,
सर झुका उसका हुआ भरपूर होता है।



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