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Ye Sach Hai Ek Muddat Se Main Andhkar Mein Hoon

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18 -May-2013 अशोक रावत Human Being Poems 0 Comments  1,581 Views
Ye Sach Hai Ek Muddat Se Main Andhkar Mein Hoon

ये सच है इक मुद्दत से मैं अंधकार में हूँ,
सूरज निकलेगा लेकिन इस ऐतबार में हूँ.



देख सकूँ मैं पूरा सूरज घर के आँगन से,
कब से ऐसी एक सुबह के इंतज़ार में हूँ.



वैसे तो उससे मेरा सम्बंध नहीं कोई,
लेकिन उसकी हर बेचैनी हर करार में हूँ.



आज नहीं तो कल बदलेगी मेरी भी दुनिया
कैसा डर, में आज अगर ग़र्दो- गुबार में हूँ.



मेरी हर पूजा को तू क्यों ठुकरा देता है,
तेरी हस्ती के आगे मैं किस शुमार में हूँ.



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