Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

इक़रार

0
01 -Apr-2020 Abbas Bohari Prayer Poem 0 Comments  107 Views
Abbas Bohari

करोना से बचने के किये सारे पूर्वोपाय
फ़िर भी हो गया संक्रमित बना असहाय

नौन तेल लकड़ी कमाना बना बस बहाना
चिड़िया चुग गई खेत अब क्या पछताना

पूरे बदन में ऐसा ताप जैसे उठ रहे शोले
कसमसा रहा अंग अंग लब कुछ ना बोले

तड़पते फेफड़ों में अटक सी गई जैसे सांस
मेरा ख़ुदा रहमान लगाए बैठा उसी पे आंस

हर जीव को है मौत आनी आज नही तो कल
चार दिन की कहानी मस्ती में निकल गए पल

जीवन मृत्यु तेरे हाथ दे दाता कुछ और साल
सुधार सकू गलतियां पूछूं अपनों गैरों का हाल

ये जिस्म तो तेरी अमानत ले ले गर तेरी मर्ज़ी
पर एक नज़र करना गौर अपने बंदे की अर्ज़ी

मेरा ख्वाब तो नही, लाया तेरी रेहमत फ़रिश्ता
हरकर पीड़ा जोड़ गया फ़िरसे दुनिया से रिश्ता

अपने घमंड में करता रहा तेरे वुजूद का इनकार
जान पर बन आई तो जाना तुझे करता हूँ इकरार

पापी अब्बास देख चुका अपनी मौत करीब से
चुकाएगा तेरा ऋण जोड़कर रिश्ता हर गरीब से



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017