Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Mehngai Ke Saamne, Janta Laachar

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29 -Nov-2016 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Inflation Poems 0 Comments  761 Views
Mehngai Ke Saamne, Janta Laachar

उत्तर भारत को चुना, कुहरे ने आवास। सरदी का होने लगा, लोगों को आभास।। -- ऊनी कपड़ों का सजा, फिर से अब बाजार। आमआदमी पर पड़ी, मँहगाई की मार।। -- सरेआम होने लगी, जमकर लूट-खसोट। अब काजू-बादाम से, मँहगे हैं अखरोट।। -- ग़ज़क-रे

Meri Gullak Toot Gai.

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23 -Nov-2016 satya saroj Inflation Poems 0 Comments  1,388 Views
Meri Gullak Toot Gai.

मेरी गुल्लक टूट गई मैंने अपने गुल्लक को, सालों से संभाल रखा था, अनेकों अनेक जेबखर्चों को, इसमें डाल रखा था । रिस्तेदारों से मिले, सौ –पचास के नोट भी रखा था, सबकी मीठी यादों को, मैंने इसमें सँजोये रखा था। जैसे ही मोदी

Do Joon Ki Roti

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03 -Jun-2016 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Inflation Poems 0 Comments  840 Views
Do Joon Ki Roti

महीना जेठ का का आया, हुई हैं रात अब छोटी बड़ी मुश्किल से मिलती है, मगर दो जून की रोटी श्रमिक को हो गया दूभर. अरहर की दाल को खाना बढ़ी महँगाई तो मजदूर की, किस्मत हुई खोटी उन्हें क्या फर्क पड़ता है, नहीं बाजार जो जाते जि

Nahi Ghate Kyon Daam?

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01 -Feb-2016 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Inflation Poems 0 Comments  1,179 Views
Nahi Ghate Kyon Daam?

-१- पूरी दुनिया में हुआ, सस्ता तेल तमाम। लेकिन उस अनुपात में, नहीं घटे क्यों दाम।। नहीं घटे क्यों दाम, मुनाफा कहाँ जा रहा। बतलाओ सरकार, दलाली कौन खा रहा।। कह मयंक कविराय, पूछना है मजबूरी। कौन करेगा आस, यहाँ जनता की प

Janta Hai Maayus

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20 -Jan-2016 Yogesh Pandey Aashiyana‎ Inflation Poems 0 Comments  1,860 Views
Janta Hai Maayus

जनता है मायूस आज सहमी, घबराई, खुशियों का घन घटा, गमों की बदरी छाई.!! मिलेगा कैसे अमन,चैन अब यहाँ सभी को, तंग हुये हालात, आयी ऐसी महँगाई....!! !! मिटा हर्ष, उल्लास जेहन में ग़म का अम्बर, है बेहाल आज जन-जीवन इस वसुधा पर..!! क्यों

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