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इंसान (Abbas)

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01 -Apr-2020 Abbas Bohari Natural Disasters Poems 0 Comments  93 Views
Abbas Bohari

सड़ाकर मिट्टी अल्लाह ने बनाया इंसान
भूलकर अपनी पैदाइश बन रहा महान

भूल गया यहां है कुछ पल का मेहमान
लगा बैठा आंस दुनिया से जो नाशवान

लूटकर माल गरीबों का बन बैठा धनवान
मुँह की खाएगा लेगा हिसाब जब भगवान

सम्भल जा जब तक है बाकी रूह में जान
अब तो झुक जा उसके दर बात मेरी मान

मृत है आत्मा जिसमें ईश्वर का नही स्थान
आया खाली हाथ होगा खाली हाथ प्रस्थान

उसके दरबार में नही तुलेंगे सारे एक समान
जीते जी यही जुटाना है परलोक का सामान

संतुष्टी से अब्बास माने हर पल तेरा एहसान
शुक्र से किये तेरे ही सजदों में पाए इत्मीनान



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