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इंसान कैद हो गया है

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04 -May-2021 Harpreet Ambalvee Social Issues Poems 0 Comments  143 Views
इंसान कैद हो गया है

आज फिर इंसान कैद हो गया है
निकले थे पिछले साल जिन हालातो से,
फिर से जिन्दगी का मौत से सामना हो गया है,
आज फिर इंसान कैद हो गया है,

पहले जिसकी थी गलती आज भी उसकी है,
जिसकी सोच मे पहले भी कुर्सी थी आज भी कुर्सी है,
जान बचाने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिली
और जनता का पैसा बुत बनाने में खो गया है,
प्रधान सेवक हाजिर है, कयोकि चुनाव बन्द हो गया है,
आज फिर इंसान कैद हो गया है,

मर्जी हर जगह बस इन्हीं की चलती है,
कुर्सी के सिवा हर एक बात इनको करना खलती है,
झूठी बातें,अफवाहे सब इनकी अखबारों और चैनलों पर चलती है,
मीडिया इंसानियत को भूलकर झूठ दिखाने मे खो गया है,
आज फिर इंसान कैद हो गया है,

महामारी थी इस देश में अम्बालवी,
लेकिन दिमाग में दहशत इन्होंने फैलाई है,
चारों और मौत की बस्तियां इन्होंने बिछाई हैं,
आज फिर इन्होंने महामारी मे लापरवाह होकर,
सबको फिर से घरों में नजरबंद कर दिया है,
फिर उसी दहशत का जहन में घर हो गया है,
आज फिर इंसान कैद हो गया है,

बस करो अब तो खुदा का खौफ करो,
इंसानियत छोड़ने वालों दानव बन कर,
यो दुनिया का न संघार करो,
मौत तुमको भी आनी है,
थोड़ा तो उस भगवान से डरो,
ना कहना फिर कि दुनिया ने,
अपना आपा क्यो खो दिया है,
आज फिर इंसान कैद हो गया है।

इंसान कैद हो गया है


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