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इंसान: सच्ची खुशियां या झूठी शान

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29 -Aug-2020 SAI Love Akash Gupta Social Poems 0 Comments  352 Views
इंसान: सच्ची खुशियां या झूठी शान

ऐ इंसान,
तुझे पता है, क्या है यह शान?
यह एक माया है जहां तुझे अपनी खुशियां त्याग कर करने होते हैं, सब काम।
तो क्या तुझे चाहिए ऐसे ही शान?

ऐ इंसान,
क्यों है तुझे इस संसार में प्यार अपनी इस झूठी शान पर,
कहां ले जाना है, तुझे अपने इस झूठे शान को?
आखिर हम सबको है मिट जाना इसी मिट्टी में,
तो क्यों चाहिए तुझे, ऐसी झूठी शान?

ऐ इंसान,
तुझे पता है, खुशियां क्या है, इस संसार में?
जिसके आने से आते हैं, हर सुखों के पल,
और जिसके जाने से जाते हैं, हर सुखों के पल।
तो क्यों नहीं चाहता, तू यह सच्ची खुशियां और सुखों का पल?

ऐ इंसान,
तुझे पता है, जब तू आया था, इस संसार में,
तो क्या लाया था साथ में?
यही ना अपनी नन्ही सी जान।
तो क्या लगता है तुझे, क्या लेकर तू जाएगा साथ?
यह सारे धन-ऐश्वर्य, और अपनी यही झूठी शान।
तो क्यों चाहिए तुझे, किसी की झूठी खुशियां और झूठा शान?

ऐ इंसान,
तुझे पता है, सभी आए हैं यहां, और जाना है एक दिन सबको ही वहां।
जहां नहीं मिलता किसी को कोई धन, ऐश्वर्य, वैभव और शान,
क्योंकि कर्म के लेख ही देखते हैं, भगवान।
तो क्यों चाहिए तुझे ऐसे झूठी खुशियां, झूठे शान और झूठा यह नाम?

क्यों करते हो समय व्यर्थ?
अब तो समझ ही गए होगे,
ऐ इंसान,
निकल पड़ो जीवन के पथ पर जहां मिले सच्ची खुशियां,
ना कि जीवन रहते लोगों के झूठे शान।
बांट सको तो खुशियां बांटो, ना कि छूटे शान।
अब तो तुम यह कह दो,
हमें चाहिए जीवन की सच्ची खुशियां, ना कि लोगों के झूठे शान।

ऐ इंसान,
लोगों का क्या है, वह तो सिर्फ बोलते ही रहेंगे।
क्योंकि उनको नहीं है, कोई दूसरा काम।
तू ना लेकर चल दूसरों की दिए हुए, यह झूठे शान।
नहीं तो तुझे रहना होगा,
लोगों के इसी झूठे शान की जाल में,
मत फसा, तू अपने आप को, इस झूठे जाल में,
तू कर्म कर, तू सत्य पथ पर चल, तू कर हर वह काम,
जिससे मिले जीवन की सच्ची खुशियां, ना कि यह झूठे शान।



Dedicated to
My family and society

Dedication Summary
We as person must have to think of our happiness which will be helpful in making others happy. But many of us are doing in opposite way i.e. we think about society, what they will think and how they will react upon our decision. This means our happiness will be decided by others not by ourselves.
This poem suggests we have to focus on the self happiness first, then see what other will think or how they will react.

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