Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कहने को तो बहुत कुछ था

0
10 -Jul-2020 Abutorab dyer Integration Poems 0 Comments  324 Views
कहने को तो बहुत कुछ था

कहने को तो बहुत कुछ था पर अल्फाज़ कम थे लिखने को अहमियत कहा है सबदो की लोग तो गुलाम दिखावे के है दिल से दिल को मिलाना है तोहड़ा तोहड़ा करके अब देश को आगे बढाना है हिन्दू मुस्लिम सीख ईसाई सब से प्यार बढ़ना है इस मुश्

एकता और अखंडता की ज्योतियां.....

0
03 -Apr-2020 DassY Integration Poems 0 Comments  229 Views
एकता और अखंडता की ज्योतियां.....

मेरे हिंदू साथियों दीपक जलाना मुस्लिम भाइयों जलाना तुम मोमबत्तियां जिन जालिमों का मकसद है हिंदुस्तान की बदनामियां खुद जलकर राख हो जायेगी उनकी बेबुनियाद शक्तियां जब हम साथ मिलकर जलाएंगे एकता और अखंडता की ज्य

शुक्रिया

0
01 -Apr-2020 Abbas Bohari Integration Poems 0 Comments  205 Views
शुक्रिया

मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे गिरजाघर लगे ताले पंडित मुल्ला पादरी सबके पड़े खाने के लाले कण कण में बसे भगवान मूरख इंसा ढूंढे कहा हो जिस दिलमें प्यार ओ परोपकार बसता वहां आओ देखे इंसानी भेष में उसका अनोखा रूप जो निभा र

कोरोना को भगाएंगे

0
21 -Mar-2020 satyadeo vishwakarma Integration Poems 0 Comments  224 Views
कोरोना को भगाएंगे

कोरोना चला के स्वच्छता का अभियान, कोरोना को भगाएँगे। कोई न इसका माई बाप, कोरोना को भगाएँगे। बहुतों को इसने बहुत सताया है, कई घरों का दीपक बुझाया है, रुकने न देंगे एक रात, कोरोना को भगाएँगे। तन मन उपवन स्वच्छ रखेंगे

फर्क

0
29 -Feb-2020 Kavya Shekhr Integration Poems 0 Comments  476 Views
फर्क

ये जाती पाती के फेर में तू क्यों बंदे पड़ता है, उसने ही (ख़ुदा) जब फर्क किया ना तू क्यों पगले करता है । खोल समझ के पर्दे अपने देख चालें कोई चलता है । हमको लड़वाता आपस मे, अपना उल्लू सीधा करता है । आओ मिल कर खाए कसम ,ना ज

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017