Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

इतिहास

0
10 -Feb-2019 Jashraj Motivational Poems 0 Comments  74 Views
इतिहास

प्रगति ही प्रगति का इतिहास बन जाता है
ऊंची ऊंची बाहों में
आकाश भी सिमट आता है
विष का घुट पीकर ही
नील कंठ कहलाता है
कांटो से घिर कर भी
गुलाब खिल जाता है
भरे भरे दल दल में
कमल ऊभर आता है
एक तिनका भी
डूबे को सहारा दे जाता है
जूझता हुआ जीवन ही इतिहास हमें दिखलाता है
प्रगति ही प्रगति का इतिहास हमें बताता है
रास्ता भले ही न हो
फिर भी मंजिल कि आश रहती है
कोई साथ हो न हो
मुकद्दर हमेशा हमारे साथ रहती है!
हर खुशी हर गम टल जाती है
हर मौसम आकर बदल जाती है
सुबह दोपहर शाम की तरह
रात भी आकर गुजर जाती है
प्रगति ही प्रगति ही
वो सुनहरा इतिहास हमें सुनाता है
Bittu raja ✍



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017