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इतना मोटा बेलन , जाने कहाँ से लाई है

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05 -Feb-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Drunk Poem 0 Comments  1,088 Views
DINESH CHANDRA SHARMA

व्यंग कविता _

रात का एक बजा जा रहा था |
एक शराबी सड़क किनारे खडा नशे में बडबडा रहा था |
“शराब पीना बात है बुरी |
इससे टूट जाती है जीवन की धुरी |
स्वास्थ पर पड़ता है दुष्प्रभाव |
लीवर गुर्दे व ह्रदय जैसे अंग,
हो जाते हें खराब |
परिवार बिखर जाते हें |
इससे तो लोग मर जाते हैं |
शपथ लेता हूँ , अपना वादा निभौउगा |
आज से शराब को हाथ भी नहीं लगाऊँगा |
दूसरा शराबी सुनता हुआ आया |
गुस्से से भुनभुनाया |
क्या अनाप शनाप बक रहे हो |
किससे बातें कर रहे हो |
पहला बोला ,”शराब से होने बाली हानियों पर ,
ट्यूशन पढ़ने जा रहा हूँ ,कल का पाठ दुहरा रहा हूँ |”
दुसरे ने अचम्भे से पूछा –
”इतनी रात गए तुम्हें ट्यूशन कौन पढ़ाता है |
कौन तुम्हें उलटी सीधी बातें समझाता है |”
“मेरी पत्नी मुझे ट्यूशन पढ़ाती है |
वही मुझे ये सारी बातें समझाती है |
एक राज बतलाऊँ –जिस दिन पाठ याद हो जाता है |
उस दिन सौ का एक नोट मिल जाता है |
जो कि अगले दिन दारु पीने के काम आता है |
मगर जिस दिन पाठ याद नहीं हो पाता है |
उस दिन की कल्पना से ही कलेजा थर्रा जाता है |”
कमर पर हाथ रख कर कराहते हुए बोला –
“अरे यार बीवी नहीं कसाई है |
इतना मोटा बेलन , जाने कहाँ से लाई है |



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