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“ जाम- ए- इश्क ”

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27 -Nov-2016 AJAY KUMAR Love Poem 5 Comments  3,157 Views
“ जाम- ए- इश्क ”

“ जाम- ए- इश्क ”

लगता हैं मेरी निगाहें तुझे छूकर आई है
बरसों दबी बातें, तुझ से कह कर आई है
निगाहों से निगाहों को बातें कह लेने दो
ना जानू, आज जुबाँ मेरी क्यों लड़खड़ाई है

अदाएं उनकी दिल को छू क्यों जाती है
बातें उनकी दिल में घर क्यों क रजाती है
रोक कहाँ सकूँगा ,आज अपने बढ़े कदम
रास्ते हर एक आज ,तेरे घर को जोजाती है

फिजाओं को जरा महक तो जाने दो
जाम- ए- इश्क में जरा डूब तो जाने दो
अजय पीता नहीं, तुझे मालूम तो होगा
कदम मेरे भी जरा आज बहक तो जाने दो

तोड़ ही देना तू साख से पत्तों की तरह
खाक़ में मिला देना सूखे पत्तों की तरह
कौन कहता है तुझे, साथ देने उम्र भर
रंग बदल तो जाने दे मेरे, टूटे पत्तों की तरह
---- अजय

“ जाम- ए- इश्क ”


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5 More responses

  • poemocean logo
    A SOMASHEKAR (Guest)
    Commented on 01-December-2016

    Excellent SOULFUL POETRY.

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    Priti (Guest)
    Commented on 28-November-2016

    Nice, lovely.

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    AKSHAY KUMAR (Guest)
    Commented on 28-November-2016

    AWESOMEEE BHAIYA.

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    J s mishra (Guest)
    Commented on 27-November-2016

    Nice, very good.

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    Mikku (Guest)
    Commented on 27-November-2016

    Lovely......

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