Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Jalebi

0
07 -Nov-2015 Prabhudayal Shrivastava Kids Poem 0 Comments  3,096 Views
Prabhudayal Shrivastava

करना नहीं बहाना पापा।
आज जलेबी लाना पापा।।

रोज सुबह कह कर जाते हैं,
आज जलेबी ले आएंगे।

दादा-दादी मम्मी के संग,
सभी बैठ मिलकर खाएंगे।

किंतु आपकी बातों में अब,
दिखता नहीं ठिकाना पापा।

आज जलेबी लाना पापा।

इसी जलेबी में मम्मी की,
बीमारी का राज छुपा है।

जब तक खाई गरम जलेबी,
जब तक अच्छा स्वास्थ्य रहा है।

एक तश्तरी गरम जलेबी,
मां को रोज खिलाना पापा।

आज जलेबी लाना पापा।।

जब-जब खाती गरम जलेबी,
घुर्र-घुर्र सो जाती दादी।

वैसे तो कहती रहती है,
नींद न आती, नींद न आती।

कितना अच्छा वृद्ध जनों को,
नींद मजे की आना पापा।

आज जलेबी लाना पापा।

जैसे पर्वत जंगल-जंगल,
हमको मिलती शुद्ध हवा है।

वैसे ही तो गरम जलेबी,
सौ दवाओं की एक दवा है।

गरम जलेबी में होता है,
मस्ती भरा खजाना पापा।

आज जलेबी लाना पापा।।

दादाजी को गरम जलेबी,
खाना बहुत-बहुत भाता है।

खाकर खुशियों का गुब्बारा,
आसमान में उड़ जाता है।

हर दिन गरम जलेबी लाकर,
अपना धर्म निभाना पापा।

आज जलेबी लाना पापा।
आज जलेबी लाना पापा

Jalebi


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017