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जीवन भी है फूलों सा

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09 -May-2021 rtripathi Life Poem 0 Comments  313 Views
rtripathi

"जीवन भी है फूलों सा"

कलियाँ खिल कर फूल बन गयी
हाँ!मगर उनकी भी पंखुडियां बिखर गयी
सपनो का संसार बना
पल भर में वह भी बिखर गया
तिनका-तिनका कर जोडा था घर अपना
पल भर में वह भी बिखर गया
अब थोडा सभंला था कि मजबूत इरादे कर लूँगा
पर तूफानों के झोंको में फूलों की पंखुडियो सा वह भी बिखर गया।

अब जाना है सौ ठोकर खाके माना है
कि,कलियाँ ही खिलकर फूल बनती
हाँ,उनकी भी पंखुडियां बिखरती है
पर,समय के इक दौर में
कलियाँ फूल बनकर ही खूशबु देती हैं

इस जीवन का दौर कुछ एसा होता है
किि,बचपन कलियों सा,यौवन खिले फूलों सा,बुढ़ापा अन्ततः संध्या के फूलों सा
हर दौर का यही साज है
इस जीवन का यही राज है।

कलियों से एसा फूल बनो
की,कुन्ज तुम्हारे शान से हो
जीवन की इस आपा-धापी में
समय की मांग बनो
परिवर्तन में खुद को सहज करो,सरल बनो----'---

ऋषभ त्रिपाठी

जीवन भी है फूलों सा


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